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मानसिक बीमारी के बावजूद जिन 5 प्रतिभाशाली महिलाओं ने दुनिया पर अपनी छाप छोड़ी

हाल के अध्ययनों ने रचनात्मकता या एक उच्च बुद्धि और मानसिक स्वास्थ्य के बीच संबंध बना दिया है। हम ऐसे पीड़ित पुरुष प्रतिभाओं के बारे में जानते है जिन्होंने बाइपोलर/ व्यग्रता विकार या अवसाद झेलने के बाद भी दुनिया को महानतम कृतियाँ दी हैं, जैसे कि विन्सेंट वान गाग, एडवर्ड मुंच, टेनेसी विलियम्स, अर्नेस्ट हेमिंग्वे या अल्बर्ट आइंस्टीन और जॉन नैश। लेकिन ऐसी ढेरों प्रतिभाशाली महिलाएं हैं जिन्होंने मानसिक बीमारी के बावजूद दुनिया के लिए कला के महान काम किए हैं।

01

जे.के. रॉउलिंग

लेखिका

मंत्र और जादू की अद्भुत दुनिया की प्रसिद्ध निर्माता को भी अवसाद के एक दौर से गुज़ारना पड़ा था। अपनी प्रसिद्धि से पहले 2008 में 20 के दशक के मध्य में अकेली माँ के रूप में उन्होंने अवसाद से संघर्ष और आत्महत्या के विचार आने का खुलासा किया। उन्होंने 9 महीने कोगनिटिव बिहेविरल (संज्ञानात्मक व्यवहार) थेरेपी का सहारा लिया। एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि “मैं वास्तव में बोझ से दब गयी थी”; “हम यहां आत्महत्या के विचार पर बात कर रहे हैं, न कि हम यह बात कर रहे हैं कि “मैं थोड़ी दुखी हूँ।”

02

कैथरीन ज़ीटा – जोन्स

अप्रैल 2011 तक, अकादमी पुरस्कार विजेता अभिनेत्री कैथरीन ज़ीटा -जोन्स को ज़्यादातर ट्रैफिक और शिकागो में शानदार अभिनय प्रदर्शन और अभिनेता माइकल डगलस से उसकी हाई प्रोफाइल शादी के लिए जाना जाता था। लेकिन वेल्श में जन्मी इस हॉलीवुड स्टार ने अपने बाइपोलर डिसऑर्डर की घोषणा करके सबको हैरान कर दिया और बताया कि वह बीमारी के लिए अस्पताल में भर्ती होकर उपचार करवा रही थी। बीच के कुछ वर्ष काफी कठिन रहे, उनके पति के कैंसर से पीड़ित होने से लेकर अपने बाइपोलर डिसऑर्डर की सार्वजनिक लड़ाई तक, लेकिन इन सबसे वह और मजबूत बनी हैं और इसके बारे में बात करने के लिए और अधिक उन्मुक्त हैं।

03

केमिल क्लौडेल

मूर्तिकार और ग्राफिक कलाकार

केमिल क्लौडेल आधुनिक मूर्तिकला के संस्थापक अगस्टे रोंडिन की एक शिष्या थी, लेकिन जब वह उनकी प्रेमिका बनी, तब इस घटना ने बहुत उत्तेजना पैदा कर दी क्योंकि रोंडिन पहले से ही एक रिश्ते में थे। अंत में केमिल के एक बच्चे को खो देने के बाद उन्होंने उस रिश्ते को तोड़ दिया। लेकिन यह उनकी अवसाद के साथ संघर्ष की शुरुआत भी थी। केमिल एक शानदार मूर्तिकार थीं जिन्होंने वेव, द मेच्योर ऐज, और द ब्रोंन्ज वाल्ट्ज जैसी कला की महान कृतियाँ बनाईं। लेकिन 1905 के बाद धीरे-धीरे उन्होंने वास्तविकता पर पकड़ खो दी और अपनी कुछ प्रतिमाओं को नष्ट कर दिया। जब वह परोनोइआ से ग्रस्त हो गई तो कुछ समय के लिए गायब हो गई। उन्होंने रोंडिन पर उनके विचारों को चोरी करने और उन्हें मारने की साजिश रचने का आरोप भी लगाया। ऐसा लगता है कि वह परोनोइआ और स्कित्जोफ्रेनिया से पीड़ित थीं। उनके परिवार ने उनको एक पागलखाने में भर्ती करा दिया जहां वह अगले 30 वर्षों तक रहीं, लेकिन डॉक्टरों ने उनके परिवारवालों को उन्हें बाहर ले जाने के लिए राजी करने की कोशिश की क्योंकि जब भी वह अपनी मूर्तियों पर काम करती थीं तो वह स्थिरचित्त रहती थीं। अंततः केमिल का 78 साल की उम्र में पागलखाने में निधन हो गया।

04

विवियन लिह

अभिनेत्री

विवियन लिह मंच और पर्दे की वह रचनात्मक प्रतिभा थी, जिसने “गॉन विथ द विंड” में जिद्दी स्कारलेट ओ’हारा को पर्दे पर जीवन्त कर दिया। इसके बाद भी वह पूरे जीवन तपेदिक के साथ उन्माद और अवसाद से पीड़ित रही। वास्तव में उनकी निजी पीड़ा अक्सर उनको एक परेशान या पागल नायिका के किरदार दिलाते थे जैसे “अ स्ट्रीटकार नेम्ड डिजायर” में ब्लांश दुबोई की भूमिका थी। सदमे से उपचार के लिए वैद्युतिक झटकों की श्रृंखला के बाद, विविएन कुछ बेहतर हुईं पर कुछ ही साल बाद वापस बीमार हो गई। उन्हें गम्भीर नर्वस ब्रेकडाउन तब हुआ जब वह गर्भपात की शिकार हुई जो अभिनेता लॉरेंस ओलिवर के साथ उनकी शादी के खुलासे का कारण भी साबित हुआ। वह अंततः हेल्लुसिनेशन (दु: स्वप्न) के साथ साइक्लिकल मैनिक डिप्रेशन (चक्रीय उन्मत्त अवसाद)से प्रभावित बताई गई और एक नर्सिंग होम तक ही सीमित रहीं। जब वह कुछ स्वस्थ हुईं तब अपनी आखिरी फिल्म में अभिनय किया, केवल 52 साल की उम्र में तपेदिक से उनकी मृत्यु हो गई, जबकि वह “द शिप ऑफ़ फूल्स” फिल्म में काम कर रहीं थी। वह अपनी कई बीमारियों के बावजूद भावुक नायिका थी और अपने स्टारडम के लिए प्रसिद्ध थी।

05

कैरी फिशर

लेखक-अभिनेत्री

फिशर स्टार वार्स में राजकुमारी लिया की भूमिका के लिए सबसे ज्यादा विख्यात है, वहीं वह सबसे अधिक बिकने वाली पुस्तक ‘पोस्टकार्ड फ्रॉम द एज’ की लेखक भी हैं, जो मादक द्रव्यों की लत के लिए पुनर्वास में बिताए अपने समय की एक अर्द्ध-आत्मकथा है। उन्मत्त अवसाद से पीड़ित होने पर उन्होंने शुरू में इलाज लेने से मना कर दिया था, जिसके गंभीर परिणाम हुए। अब फिशर इलाज नहीं करने की गलती से दूसरों को बचाने के लिए मदद करने को प्रतिबद्ध है। 2002 में, फिशर को मानसिक बीमारी के बारे में सच बोलने और अपने व्यक्तिगत अनुभव को साझा करने के लिए इरेज़िंग द स्टिग्मा लीडरशिप पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

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