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5 महत्वपूर्ण किताबें जिनका सरोकार नारी और मानसिक स्वास्थ्य से है

महिलाओं की मानसिक बीमारी लंबे समय तक कथा साहित्य में चित्रित की गई है। सिल्विया प्लाथ की अर्द्ध आत्मकथात्मक द बेल जार से लेकर वैली लैम्ब की शी हैस कम अनडन तक - साहित्य महिलाओं की ऐसी कहानियों का बड़ा भंडार है जो साधारण से कहीं ज्यादा मनोवैज्ञानिक बाधाएं पार करने में लगी हुई हैं। यहाँ ऐसी 5 महान किताबे के बारे में लिखा गया है।

ऍम और बिग हूम

जैरी पिंटो द्वारा

शानदार हास्य और दिल को छू जाने वाली किताब, जैरी पिंटो की ऍम और बिग हूम हाल के वर्षों की आई एक शक्तिशाली प्रथम उपन्यास है, और निश्चित रूप से एक भारतीय लेखक की ओर से मानसिक बीमारी पर लिखे गये सबसे मार्मिक उपन्यासों में से एक है। यह इमेल्डा मेंडेस की कहानी कहती है – जिसे परिवारवाले ऍम बुलाते हैं – उसे बाईपोलर डिसऑर्डर है, और वह अपने पति अगस्टीन और दो बच्चे के साथ मुंबई में अपने छोटे फ्लैट में रहते हैं। जब ऍम का बाईपोलर डिसऑर्डर बढ़ जाता है तो वह राक्षसिक हो जाती है, जिसके चलते कभी कभी ऐसे घातक परिणाम सामने आते है जो उसके लिए और दूसरों के लिए डरावने होते हैं। इस पुस्तक में एक खास आवाज है जो कि पुस्तक खत्म होने के बाद लंबे समय तक आपके साथ बनी रहती है।

मिसेज़ डालोवे

वर्जीनिया वूल्फ के द्वारा

मिसेज़ डालोवे एक क्लासिक किताब है जो इंग्लैंड में प्रथम विश्व युद्ध के बाद काल्पनिक उच्च समाज की औरत क्लारिसा डालोवे के जीवन के एक दिन का विवरण है। यह वूल्फ के सबसे प्रसिद्ध उपन्यासों में से एक है, जिसमें मानसिक रूप से बीमार के उपचार की आलोचना की गयी है। प्रथम विश्व युद्ध के एक दिग्गज, सेप्टीमस का चरित्र चित्रण करने के लिए वूल्फ ने बाईपोलर डिसऑर्डर के साथ अपने संघर्ष का इस्तेमाल किया।

द आइसोलेशन डोर

अनीश मजूमदार द्वारा

नील की खूबसूरत और करिश्माई मां प्रिया, स्कित्जोज़ोफ्रेनिया के साथ लंबे समय से चल रही लड़ाई हार रही है। अपनी मां के एक और बिखराव के अनुभव के बाद, उसे इस दर्दनाक वास्तविकता का सामना करना होगा कि कैसे उसके पिता, उसकी चाची, और डॉक्टर वर्षों तक अपने अपने त्रुटिपूर्ण तरीकों से प्रिया की बीमारी के साथ पेश आये हैं। और जब उसकी प्यारी माँ फिर अंधेरे से घिर जाती है तब उसे अपने जीवन का सबसे मुश्किल फैसला लेना होगा कि क्या वह परिवार के साथ एकजुट रहे या हमेशा के लिए उन लोगों से रिश्ता तोड़ ले।

वेस्टेड: अ मेमॉयर ऑफ़ एनोरेक्सिया एंड बुलिमिया

मार्या हार्णबाकर द्वारा

एक ज्वलंत, ईमानदार और भावनात्मक रूप से विदारक संस्मरण, वेस्टेड एक महिला की वास्तविकता के स्याह पक्ष से गुज़रने की कहानी है, उसके एनोरेक्सिया और बुलिमिया के साथ संघर्ष और उसके अपनी शर्तों पर अपने तरीके से वापस रास्ता खोजने के निर्णय की गाथा है। पांच अस्पतालों में लंबे समय तक रहना, अंतहीन चिकित्सा, और परिवार, दोस्तों, नौकरी का छूट जाना, और वह सब कुछ जिसका मतलब ‘सामान्य’ है, इन सबके साथ मार्या हार्णबाकर ने अपनी अनुभवों के बारे में लिखा हैं। उन्होंने एनोरेक्सिया और बुलिमिया को तब तक प्यार से गले लगाए रखा जब तक कि कॉलेज में उस रोग से सम्बन्धित एक भयावह घटना ने इस रोमांस को हमेशा के लिए समाप्त दिया।

एन अनक्वाइट माइंड: अ मेमॉयर ऑफ़ मूड एंड मैडनेस

के रेडफील्ड जैमिसन द्वारा

एन अनक्वाइट माइंड (एक अशांत मन) जबरदस्त स्पष्टवादिता, जीवंतता और ज्ञान का संस्मरण है। डॉ जैमिसन मैनिक डिप्रेसिव (बाईपोलर) बीमारी पर सिर्फ अग्रणी प्राधिकारियों में से एक ही नहीं है; उन्हें इसका सीधा अनुभव भी है। जब वह चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में करियर बना रहीं थीं, जैमिसन ने खुद को उन्ही प्रन्पोशक उन्माद और प्रलयंकर अवसाद में घिरता पाया जिसने उनके कई रोगियों को प्रभावित किया था। इस विकार ने आते ही बर्बादी की हद तक खर्चों, हिंसा की घटनाएँ और एक आत्महत्या का प्रयास भी उत्पन्न किया। उन्मत्त अवसाद पर यह एक निर्णायक किताब है, जो रोगी और आरोग्य साधक के दोहरे दृष्टिकोण से उन्मत्त अवसाद की परख कराती है।

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