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7 वजहें जिनके कारण भारतीय आत्महत्या करते हैं

भारत में हर साल एक लाख से ज्यादा लोग आत्महत्या करते हैं, जो विश्व के औसत का बड़ा हिस्सा है। सरकारी आंकड़ों* के अनुसार 2014 में 1,31,666 लोगों ने आत्महत्या की। आत्महत्या करने वालों में 80% लोग साक्षर थे, जो देश की राष्ट्रीय साक्षरता दर 74% से अधिक है। सवाल यह है कि लोग ऐसा चरमपंथी कदम उठाने का फैसला क्यों करते हैं; आखिर ऐसा क्या है जिसके चलते वे जीवन का मोह त्याग देते हैं? पता करते हैं…

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घरेलू हिंसा

घरेलू हिंसा भारत में आत्महत्या के मुख्य कारणों में से एक है। इस तरह के मामलों में ज्यादातर महिलाएं ही आत्महत्या की शिकार होती हैं। लगातार तनाव और अशांति का कारण अवसाद और अंत में आत्महत्या की ओर ले जाता है।

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रिश्ते और पारिवारिक समस्याएं

युवाओं के बीच, यह आमतौर पर रिश्ते और प्यार में विफल रहने पर होता है, धोखाधड़ी और सम्बन्ध विच्छेद व्यक्ति को आत्महत्या की ओर ले जा सकता है। यहाँ तक कि विवाहित जोड़ों के लिए गलतफहमी, आपसी मतभेद और विश्वासघात भी आत्महत्या के कुछ कारण हैं। माता पिता, भाई बहन या साथी का अपमानजनक बर्ताव भी आत्महत्या के प्रयास के लिए योगदान करते हैं।

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वित्तीय कारण

कर्ज का भुगतान करने में असमर्थता, काम की तलाश, परिवार का सहारा और बीमार माता पिता के मेडिकल खर्चों को पूरा करने में नाकाम रहना वह वित्तीय कारण है जो लोगों को आत्महत्या करने की ओर ले जाते हैं। ऋण देने वाली संस्थाएं और साहूकार आम तौर पर ऋण लेने वालों से भारी मात्रा में ब्याज लेते हैं और उन्हें धन वापस करने के लिए लगातार परेशान करते हैं। इन व्यक्तियों से लगातार तनाव उधार लेने वालों को आत्महत्या की ओर धकेल देते हैं।

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शिक्षा

भारत में छात्रों की आत्महत्या कोई अनोखी बात नहीं है। आमतौर पर इन आत्महत्याओं का कारण होता है दोस्तों से बेहतर प्रदर्शन करने की चाह और माता-पिता का मानसिक दबाव। छात्रों पर हमेशा ही अच्छे ग्रेड लाने और माता-पिता की अपेक्षाओं में खरा उतरने का दबाव रहता है, इसलिए जब वे किसी परीक्षा में असफल होते हैं तो अपना जीवन समाप्त करने का फैसला ले लेते हैं। इन आत्महत्या पीड़ितों का सामाजिक स्तर आमतौर पर मध्यम वर्ग या निम्न मध्यम वर्ग होता है, जिसमें माता पिता को बच्चों की शिक्षा के खर्च को पूरा करने के लिए पैसे उधार लेने पड़ते हैं या उन्हें अतिरिक्त काम करना पड़ता है।

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मादक पदार्थों और शराब की लत

मादक पदार्थों का सेवन भारतीय समाज में सभी वर्गों को प्रभावित करता है। मादक द्रव्यों के सेवन से संबंधित आत्महत्याएं आम तौर पर मानसिक असंतुलन, काफी समय से चल रहा अवसाद, नशीली दवाओं के कारण मतिभ्रम, अधिक मात्रा में मादक पदार्थ लेना और अपनी लत को पूरा करने में वित्तीय असमर्थता के कारण होती हैं।

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लाइलाज शारीरिक बीमारियां

भयानक शारीरिक बीमारियां जैसे कैंसर, एसटीडी और अन्य लाइलाज बीमारियों के कारण लोग आत्महत्या करते हैं। 2014 में, सरकार के रिकॉर्ड बताते हैं कि आत्महत्या के 15,419 मामले पुरानी और लम्बी बीमारियों से सम्बंधित थे। लगातार दर्द और ठीक होने की कोई उम्मीद नहीं होने पर आमतौर पर लोगों को लगता है कि पीड़ा सहने से मौत बेहतर विकल्प है।

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मानसिक बीमारियों से पीड़ित

वर्ष 2014 में मानसिक बीमारियों से पीड़ित 7104 भारतीयों ने आत्महत्या कर ली। यह मुख्य रूप से देश में इस विषय को लेकर कलंक और जड़ता की वजह से है। यहाँ तक की साक्षर लोग भी इन लक्षणों की अनदेखी करना चाहते हैं जो इससे भुगत रहे लोगों को आत्महत्या की ओर ले जाते हैं। निरक्षर लोगों का एक हिस्सा मानसिक बीमारियों को प्रेतात्मा के कारण मानता है और झाड़-फूंक से उपचार कराते हैं, जो पीड़ितों के लिए मददगार नहीं होता है और उन्हें आत्महत्या की ओर ले जाता है।

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