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व्यग्रता (एन्ग्ज़ाइटी) क्या है?

वास्तव में व्यग्रता (एन्ग्ज़ाइटी) अधीरता, भय, चिंता और घबराहट का मिला जुला रूप है। आप इसे खास तौर पर तब महसूस करते हैं जब आप कोई चुनौतीपूर्ण काम करते हैं या जीवन में बदलाव लाने वाला फैसला लेते हैं । हर किसी को जीवन के किसी न किसी मुकाम पर इसका सामना करना पड़ता है। यह एक सामान्य बात है।
यदि आपको व्यग्रता का सामना बार-बार करना पड़ता है और इससे आपकी नींद, खान-पान तक प्रभावित हो तो इस स्थिति को गंभीर व्यग्रता कहते हैं। यह ऐसी स्थिति है जो आपको शारीरिक रूप से भी प्रभावित कर सकती है। लंबे समय तक व्यग्रता चलने पर स्थिति और खराब हो सकती है। फिर भी आपको घबराने की जरूरत नहीं है, विशेषज्ञ के पास जाकर आप फिर से सामान्य हो सकते हैं।

एन्ग्ज़ाइटी के प्रकार

यह दशा कई प्रकार की होती है और कभी कभी तो इसके कई प्रकार एक साथ हमला बोल सकते हैं। आपको किस प्रकार की व्यग्रता है इसका पता लगना दरअसल आपके पुनः सामान्य होने की तरफ का पहला महत्वपूर्ण कदम होता है। आइए जानते हैं यह व्यग्रता कितने तरह की होती है :-

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सामान्य व्यग्रता विकार

इसे अंग्रेजी में जनरलाइज्ड एन्ग्ज़ाइटी डिसऑर्डर (GAD) भी कहते हैं। मुख्यतः यह सबसे ज्यादा पाया जाने वाला विकार है। यह काफी तीव्र , गंभीर और प्रायः निरर्थक विकार है, जो आपकी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी का हिस्सा बन जाता है। इस विकार से ग्रस्त होने पर व्यक्ति धन-दौलत, मित्रता, सेहत और रोजगार, यहां तक कि अपने जीवन पर भी मुसीबत की बेवजह आशंका करने लगता है। शरीर पर इसका प्रभाव कमजोरी,मितली, सिरदर्द, मांसपेशियोंमें ऐंठन, अधीरता, अनिद्रा और ज्यादा पसीना आने के रूप में दिखाई देता है।

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संत्रास या पैनिक डिसऑर्डर

किसी को जब बार बार व्यग्रता के दौरे पड़ने लगें तो संबंधित व्यक्ति ‘पैनिक एन्ग्ज़ाइटी’ यानी संत्रास से प्रभावित हो जाता है । इस दशा में रोगी की अधीरता बढ़ जाती है और सारा ध्यान फिर पड़ने वाले पैनिक अटैक पर अटक जाता है। इस विकार के शारीरिक लक्षणों में दिल की धड़कन बढ़ जाना, पसीना आना, तेज़ी से सांस लेना,चक्कर आना, छाती में दर्द, रुलाई छूटना आदि शामिल हैं।

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सामाजिक डर

जीवन में अगर आपको कभी मंच पर आने का भय या शर्म महसूस हुई हो, तो यह पूरी तरह से सामान्य बात है। अगर आप आसपास के लोगों से हमेशा डर या शर्म महसूस करने लगें तो हो सकता है कि आप सोशल फोबिया या सामाजिक डर की भावना से ग्रसित हो गए हैं। इस दशा में लोगों को यह डर सताता है कि दूसरे उनके बारे में क्या धारणा बनाते/रखते हैं। यदि आपको पार्टियों, मीटिंगों, समूह में लोगों के साथ मनोरंजन करने, यहां तक की डेटिंग पर जाने से डर लगता है तो आशंका है कि आप सोशल फोबिया के शिकार हो गए हैं।

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पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेनस डिसआर्डर’ (PTSD)

यदि आप बीते हुए कल में किसी शारीरिक या मानसिक हादसे का शिकार हुए हैं और बार-बार वही हादसा या घटना आपको याद आता है तो हो सकता है कि आघात के बाद होने वाले तनाव विकार यानी ‘पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेैस डिसआर्डर’ (PTSD) ने आपको घेर लिया हो। एक बार यह विकार होने पर कई बार तो हादसे के वर्षों बाद तक यह बना रहता है। बेहतर होगा PSTD से निपटने के लिए आप किसी विशेषज्ञ से सलाह लें। इस दशा के शारीरिक प्रभावों में अनिद्रा और अनवरत थकावट शमिल हैं।

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ऑब्सेसिव कम्पल्सिव डिसआर्डर (OCD)

यदि किसी विचार या काम को बार बार करने के लिए आप खुद को बाध्य पाते हैं तो इसका इशारा सीधे-सीधे ऑब्सेसिव कम्पल्सिव डिसआर्डर (OCD) की ओर है। किसी खास थाली में खाना खाना इस दशा का सबसे सरल रूप है, पर अगर वह थाली न मिलने पर आप खाना ही त्याग दें तो यह गंभीर विकार की ओर इशारा है। कुछ और उदाहरण जैसे कुछ ही मिनटों के अंतराल पर बार-बार हाथ धोना या बार-बार उठकर यह जांचना कि ताला ठीक से लगा है कि नहीं, गंभीर विकार के लक्षण हैं। गौर से देखा जाये तो ओब्सेशन रोज़ मर्रा कि ज़िन्दगी पर असर डालता है।

व्यग्रता के कारण

जैसे व्यग्रता कई प्रकार की होती है वैसे ही उसके लक्षण भी। हालांकि, लक्षणों के आधार पर ही इसकी पहचान आसान हो जाती है। व्यग्रता के दो कारण होते हैं - आंतरिक और बाहरी। आइए एन्ग्ज़ाइटी के लक्षणों और उसके कारणों को जानने में आपकी मदद करते हैं :-
बाहरी कारण
दुर्घटनाएं शारीरिक प्रताड़ना
यौन उत्पीड़न युद्ध का अनुभव
आंतरिक कारण
अत्यधिक चिंता बेवजह की जिद या सनक
हादसा या आघात

संकेत व लक्षण

 
भावनात्मक लक्षण

भावनात्मक लक्षण

अनिद्रा

अधीरता

अत्यधिक चिंता

तीव्र संत्रास

हर क्षण घबराहट

शारीरिक लक्षण

शारीरिक लक्षण

सर्दी और गर्मी दोनों मौसमों में पसीना आना

धड़कन तेज़ होना

मतली

सांस फूलना

मांसपेशियों में दर्द

निदान और उपचार

व्यग्रता मिटाने में सही मार्गदर्शन की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। कई बार गलत दवा और परामर्श आपको अन्य कई बीमारियों की चपेट में ला सकता है।

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पेट में तितलियां उड़ने जैसे अजीब अहसास से हर कोई चिंतित महसूस करता है। लेकिन क्या डर और चिंताओं की वजह से आप महत्वपूर्ण मौकों और खुशियों से चूक रहे हैं? क्या व्यग्रता (एन्ग्ज़ाइटी) आप के जीवन में बाधा डाल रही है? जहां मामूली व्यग्रता (एन्ग्ज़ाइटी) बहुत थोड़ा असर करने वाली हो सकती है, वहीं गंभीर व्यग्रता (एन्ग्ज़ाइटी) आपको भयंकर जकड़ में ले सकती है।इस टेस्ट के जरिए अपनी व्यग्रता (एन्ग्ज़ाइटी) के स्तरों का बेहतर पता लगाएं।

प्रश्नोत्तरी के जरिए कुछ पलों में जानिए व्यग्रता के प्रभाव

अस्वीकरणः यह टेस्ट केवल व्यग्रता (एन्ग्ज़ाइटी) के लक्षणों का संकेत देने, और यह समझने के लिए है कि क्या आगे जांचें कराने की ज़रूरत होगी या नहीं। यह किसी भी प्रकार से पेशेवर जांच नहीं है - उसके लिए आपको किसी सुयोग्य डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ को दिखाना होगा - जिसे आप यहां खोज सकते हैं।

  • मैं खुद अपनी मदद कैसे कर सकता हूं?
  • यदि कोई व्यग्रता से ग्रसित हो तो मैं उसकी सहायता कैसे करूं ?
  • अवसाद के साथ होने वाली बीमारियाँ

आपका यह मानना कि आप व्यग्रता से ग्रसित हैं, शीघ्र स्वस्थ होने का पहला कदम है। आप सही जगह पहुंचे हैं, यहां आप पाएंगे कि रोग से उबरने में हर मदद यहां मौजूद है।

अपने क्षेत्र के मनोचिकित्सक के बारे में जानने के लिए यहां <क्लिक> करें

अगर आपको यह नहीं पता कि किस तरह की व्यग्रता से आप ग्रसित हैं तो जानकारी देने वाली यह प्रश्नोत्तरी आपकी सहायता कर सकती है।

व्यग्रता के शिकार किसी व्यक्ति से बातचीत के दौरान आप भ्रमित, लाचार या परेशान महसूस कर सकते हैं। आप उस आदमी के साथ अधिक से अधिक समय बिताएं। उसे आश्वस्त करें कि वह बिना किसी भय के कभी और कहीं भी आपसे अपने दिल की बात कह सकता है। दूसरों को माफ़ करने वाले बनें। रोचक कार्यों में उसकी सक्रियता बढ़ाएं और उसे बाहर घुमाएं। विकास होने पर उस पर गर्व करें। परेशान ना हों आपको याद रखना होगा कि व्यग्रता से ग्रसित व्यक्ति सिर्फ विचार से ही विकार ग्रस्त नहीं, इसमें रासायनिक प्रक्रिया भी शामिल है। अक्सर व्यग्रता के कारणों पर चर्चा से बचें। यह भी ध्यान दें कि व्यग्रता कहीं आपको चपेट में न ले ले।

तुरंत सब कुछ बदलकर सही हो जाने की अपेक्षा न करें। इसकी वजह है कि व्यग्रता पर अंकुश लगने में समय लगता है। ध्यान रखें कि उस व्यक्ति को ग्लानि का अहसास न हो। साथ ही यह भी याद रखें कि व्यग्रता से प्रभावित व्यक्ति को अक्सर अपनी परिस्थिति से बाहर निकलने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। व्यग्रता के विकार से मुक्ति संभव है इसीलिए आशा मत छोड़िए।

अवसाद के साथ साथ संत्रास या अन्य शारीरिक बीमारियाँ हो सकती हैं। कई बार संबंधित व्यक्ति नशा करने लगता है, जो मानसिक और शारीरिक विकार भी उत्पन्न कर देता है। अवसाद से ग्रसित होने पर सेरोटोनिन हारमोन की खून में कमी होने लगती है जिससे हृदय रोगों के बढ़ने का खतरा पैदा हो जाता है। अवसाद में ज्यादा खाना, पल भर में मूड का बदल जाना और अनिद्रा जैसी दशा भी आम है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

इसके कई कारण हैं मसलन अनुवांशिक, मानसिक और पूर्व में हुए आघात।

अगर आप रोजमर्रा के जीवन में आने वाली परिस्थितियों और चुनौतियों का सामना करने में अत्यधिक चिंतित हो जाते हैं तो हो सकता है इस रोग ने आपको जकड़ रखा हो। यह जानने के लिए कि किस प्रकार के विकार ने आपको घेर रखा है आपको खुद से कुछ सवाल करने होंगे।

इसका इलाज कभी दवाएं तो कभी मनो-विशेषज्ञ से चर्चा या कई बार दोनों ही होते हैं। आपको अस्पताल में भर्ती नहीं होना पड़ता। आपके पूरी तरह ठीक हो जाने तक मनो-विशेषज्ञ के साथ चर्चाओं के दौर और दवाओं की नियमित खुराक चलते हैं।

  • यदि आपके व्यवहार में कोई परिवर्तन हो तो उसे और लक्षणों को लिखकर ले जाएं। इस पर डॉक्टर से चर्चा करें।
  • यदि आप अवसाद से जुड़ी कोई दवा खा रहें हैं तो उसे डॉक्टर को दिखाएं।
  • अपने सभी सवालों को अपने मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ के सामने रखें।
  • संभव हो तो अपने किसी दोस्त या परिजन को भी अपने साथ लेकर जाएं।
  • जो भी आप सोचते हैं उसके बारे में अपने मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से खुलकर बात करें।

एन्ग्ज़ाइटी को आपका थेरेपिस्ट वैसे दूर नहीं कर सकता जैसा की सामान्य शारीरिक विकारों में होता है। यहां पर तो थेरेपिस्ट को आपकी मदद भी चाहिए। खुद को थोड़ा बेहतर महसूस करते ही इलाज बीच में न छोड़ें। अपनी दवाएं निरंतर लेते रहें साथ ही मनोचिकित्सक के साथ चर्चा तब तक करते रहें जब तक कि आपको इसे छोड़ने की चिकित्सकीय सलाह न दी जाए।

समस्या के अनुरूप आप मनोवैज्ञानिक, साइकोथेरेपिस्ट या मनोरोग चिकित्सक से सलाह ले सकते हैं। जनरल फिजीशियन के पास आपके विकार का उपाय नहीं होगा परन्तु यह संभव है कि वह किसी विशेषज्ञ के बारे में सुझाव दे सकें।

इस साइट के माध्यम से आप यहां भी थेरेपिस्ट खोज सकते हैं।

बाजार में तमाम किताबें और नेट पर कई वेबसाइटें आपको इसकी जानकारी दे सकती हैं। आप हमारे रिसोर्स सेक्शन में जाकर भी और जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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