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मानसिक रूप से बीमार प्रियजन के साथ बातचीत

अपने प्रियजन जो मानसिक रूप से बीमार (या कोई और जो मानसिक रूप से बीमार है) के साथ बातचीत काफी चुनौतीपूर्ण हो सकती है। ऐसे परिदृश्य में सम्बंधित व्यक्ति के साथ सम्मान और सहानुभूति से पेश आना सबसे महत्वपूर्ण है। इससे उन्हें लगता है कि उनकी बात को सुना और समझा जा रहा है और दूसरों के साथ उनके संबंधों में सुधार होता है और मानसिक बीमारी से ग्रस्त लोग जो सामाजिक अलगाव अनुभव करते हैं उसको खत्म करती है।

यह संभव है कि यदि उन्हें बातचीत में टकराव के स्वर लगें तो वे बचाव की मुद्रा में आ जाएं। आप अधिक दयालु और उत्सुक होकर शुरू कर सकते हैं। उन्हें बिना बाधित किए जितना वे बात करना चाहते हैं करने दें। यही कारण है कि कई चिकित्सक चिंतनशील सुनने का सुझाव देते हुए प्रतिक्रियाशील सुनने का विरोध करते हैं। चिंतनशील सीखना कार्ल रोजर्स के ग्राहक केंद्रित चिकित्सा पद्धति का परिणाम है जो सहानुभूति पर जोर देती है। चिंतनशील सीखने में दर-असल समझने के एकमात्र उद्देश्य से सुनना होता है और यह आपको उनकी भावनाओं और अनुभवों को भी देखने का मौका देता है। आप उनसे विनम्रता से पूछते हुए या जो उन्होंने अभी कहा उसकी पुष्टि करते हुए शुरुआत कर सकते हैं और कि जो आपने बातचीत से अनुमान लगाया गया है वास्तव में उनका वही कहने का मतलब है।

चिंतनशील सुनने के पीछे विचार उनकी मानसिक बीमारी (भले ही वे वास्तविकता के संपर्क में नहीं हैं) की हद की परवाह किए बिना उनके दृष्टिकोण को समझने का है। इसलिए यहाँ तक कि जब आप उनके विचारों से सहमत नहीं हैं उन्हें बीच में रोककर गलत साबित न करें। हमेशा ध्यान रखें कि हो सकता है वे बहुत दर्द और गुस्से को झेल रहे हैं, और वे रो सकते हैं क्योंकि वे अपनी भावनाओं का सामना करने में असमर्थ हैं। ऐसी स्थिति में उन लोगों के साथ बैठ जाओ और उन्हें बताओ कि तुम समझने की कोशिश कर रहे हो कि वे क्या कहना चाह रहे हैं और उन्हें आश्वस्त करो कि आप वहां उनके लिए ही हो और ध्यान से उन्हें सुनो। इससे पहले उन्हें नहीं सुनने के लिए माफी माँगो।

एक संभावना को हमेशा ध्यान में रखना चाहिए कि कोई जो मानसिक रूप से बीमार है हो सकता है वह आप से बात न करना चाहे। ऐसी स्थिति में शरीरिक भाषा बहुत सहायक हो सकती है। आँख के संपर्क और हाथों की हरकत जैसे सूक्ष्म संकेत पर गौर करें। यदि वे बात नहीं करना चाहेंगे तो वे आँख के संपर्क करने से बचेंगे और घबराहट के साथ हाथों से खेलने या आसपास घुमाने जैसे परेशानी के संकेत नज़र आएंगे।

अपने प्रियजन से बात करते समय सुनिश्चित करें कि आप जो कह रहे हैं उस पर आप उन्हें प्रक्रिया और प्रतिक्रिया के लिए समय दे रहे हैं। यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि ज़्यादातर संघर्ष और मुद्दे एक बार बातचीत से हल नहीं किए जा सकते हैं। इससे पहले कि व्यक्ति में एक और परिवर्तन हो जाए अनुकूल वातावरण में बार- बार बातचीत करें। ध्यान रखें कि किस वातावरण में बातचीत सफल रही और किस वातावरण में सफल नहीं रही। यह एक व्यक्ति में भावनात्मक प्रतिक्रिया को तेज़ करने वाली कुछ चीजों की पहचान करने का मौका देगी।

एक अन्य बातचीत की रणनीति जो इस्तेमाल की जा सकती है वह लीप संचार मॉडल है। लीप परस्पर विरोधी भावनाओं को हल करने में साथ देने, उनको सुनने, सहानुभूति करने, सहमत होने के लिए प्रोत्साहित करती है। यह उन्हें और अधिक विश्वास करने के लिए प्रोत्साहित करती है। ऐसा करने से आप उन्हें जानने देते हैं कि आप उनकी समस्या के लिए खुले हैं और आप साझा लक्ष्य की भलाई के लिए अपने विचारों के साथ समझौता करने को तैयार हैं।

अंतिम लेकिन कम महत्वपूर्ण नहीं है कि कितनी देर तक वे बात करें इसकी सीमा आप निर्धारित करते है। यह करना बड़ी मुश्किल बात है क्योंकि यह प्रकट हो सकता हैं, कि आप उदासीनता के लक्षण दिखा रहे हैं। यह आवश्यक है क्योंकि लगातार अपनी भावनाओं को व्यक्त करना भारी हो सकता है चूँकि वे बहुत सारी भावनाओं को एक ही समय पर जताते हैं। यह सीमा भी आपको उनकी भावनाओं को बेहतर समझने का मौका देगा। आप कह सकते हैं, "मुझे खेद है कि आप बता रहे हैं, लेकिन एक पल के लिए रुकें और गहरी साँस लें।"

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