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साइबर धौंसियाना

14 साल की सान्या को स्कूल में काफी दिक्कतें आ रही हैं। बढ़ते उम्र के साथ, उसका वजन घट-बढ़ रहा है। उसके सहपाठी उसे “मोटी” कहकर चिढ़ाते हैं, उसे झाड़ियों में धकेल देते हैं, और मज़ाक बनाने के लिए उसकी मेज़ पर खाने के टुकड़े बिखेर देते हैं। कुछ दिन पहले उसके एक सहपाठी ने खाना खाते समय ली गई सान्या की एक फोटो ऑनलाइन साझा किया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर उसके खिलाफ कटु मन्तव्यों और बेइज्ज्ती की बाढ़ आ गई। लोगों ने उसे “बदसूरत”, “डरावनी” और “भुक्कड़” कहा। इस घटना के बाद से सान्या अपने सहपाठियों से बहुत कम बात करती है, और जितना हो सके उनसे छिपकर रहने लगी है। घर पर भी वह गुमसुम-सी और सबसे अलग रहने लगी है। इस ऑनलाइन यातना से पहले, वह एक चीज जो उसे खुशी देती थी वह था घर वापस जाना। अब, वह घर पर भी चिंतित और व्यग्र महसूस करती है। उसकी सुरक्षित जगह जैसे उससे छीन गई हो।

उपर वर्णित काल्पनिक कथा साइबर धौंस के शिकार बच्चों की भावनाओं को दर्शाती है।

साइबर धौंसियाना क्या है और यह अन्य तरह के धौंस के तरीकों से किस तरह अलग है?

साइबर धौंसियाना, जिसे ऑनलाइन धौंसियाना या साइबर उत्पीड़न भी कहा जाता है, किसी ऑनलाइन मंच पर धौंसियाने का एक रूप है, या किसी को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया व्यवहार है। (स्लोन्ये एवं अन्य, 2012)|

यह परंपरागत या ऑफ़लाइन धौंस से अलग है, क्योंकि यह इंटरनेट पर होता है। हालांकि, एक साथ दोनों तरह के धौंस के शिकार होने की संभावना ज्यादा है (59.7%, स्नाइडर एवं अन्य, 2012)। दोनों तरह के धौंस के जनसांख्यिकीय आकड़े भी थोड़े भिन्न हैं। पारंपरिक धौंस लड़कों के बीच अधिक प्रचलित हैं, लेकिन कुछ रिपोर्टों के अनुसार साइबर धौंस का शिकार होने की संभावना लड़कियों और लड़कों, दोनों के लिए समान है (माइक्रोसॉफ्ट अध्ययन, 2012)। पारंपरिक धौंस की संभावना कम होने लगती है जैसे-जैसे बच्चे माध्यमिक विद्यालय से उच्च विद्यालय में जाते हैं, वहीं साइबर धौंस की संभावना बढ़ने लगती है जब बच्चे युवावस्था में प्रवेश करते हैं (स्नाइडर एवं अन्य, 2012)।

भारत में यह कितना प्रचलित है?

साइबर धौंस के मामलों की संख्या के आधार पर 25 देशों में भारत तीसरे स्थान पर है। माइक्रोसॉफ्ट द्वारा किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि भारत में 8 से 17 साल की उम्र के बीच 53% बच्चों ने ऑनलाइन धौंस का सामना किया है।

उत्पीड़न

जिसमें धौंस जमाने वाला ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों पर अभद्र या बदनाम करने वाले संदेश भेजता है।

आउटिंग

(प्रकाशित करना): जिसमें धौंस जमाने वाला दूसरे की व्यक्तिगत जानकारी को सार्वजनिक रूप से प्रकाशित कर देता है।

धोखाधड़ी

जिसमें धौंस जमाने वाला गुमनाम रूप से किसी को परेशान करने के लिए एक फर्जी पहचान बनाता है।

साइबर धौंस के मनोवैज्ञानिक प्रभाव

परंपरागत धौंस के समान, साइबर धौंस जमाने वालों में भी इसके कारण कई मनोवैज्ञानिक समस्याएं पाई जाती है, जैसा इसके शिकार बच्चों से साथ होता है। कुछ रिपोर्ट बताती हैं कि अगर यह पारंपरिक धमकियों के साथ मिल जाए तो नुकसान और भी अधिक हो सकता है। इसका कारण यह है कि इलेक्ट्रॉनिक संचार व्यवस्था साइबर धौंस जमाने वाले अपराधियों को गुमनामी बनाए रखने, और खुद को इसके शिकार व्यक्तियों से दूर रखने में सहायक होता है। अन्ना चण्डी, टी ए विश्लेषक, और द लिव लव लाफ फाउंडेशन की अध्यक्षा का कहना है कि, “आभासी रूप से जुड़े रहने के कारण लोगों के पास ऐसा कोई यंत्र नहीं होता जो उनके द्वारा सीमा को लांघे जाने की सूचना उन्हें दे सके।”

धौंस जमाने वाले लोग अपने गुस्से पर काबू नहीं रख पाते हैं, और वे व्यग्रता और आत्मविश्वास की कमी से जुझते हैं। दूसरी तरफ, इसके शिकार लोगों के आत्मसम्मान में विनाशकारी चोट लगने की वजह से उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ता हैं, जैसे स्कूल या कॉलेज में खराब प्रदर्शन, आत्मक्षति, सामाजिक व्यग्रता, गंभीर अवसाद और चरम परिस्थितियों में – आत्महत्या।

ऑनलाइन आचरण में परिवर्तन।

  • पहले बच्चे हमेशा अपने कंप्यूटर से चिपके रहते थे लेकिन अब उसका इस्तेमाल करने में झिझकते हैं।
  • इस बात का ध्यान रखें कि जो बच्चे ऑनलाइन बहुत समय बिताते हैं, उनके साइबर धौंस का शिकार होने की अधिक संभावनाएं होती हैं।

मनोदशा में परिवर्तन, खासतौर पर लैपटॉप या फोन इस्तेमाल करने के बाद।

खानपान की आदतों में परिवर्तन

  • यह ज्यादातर तब होता है जब आपका बच्चा उसके शारीरिक गठन के लिए ऑनलाइन शर्मिंदगी झेल रहा होता है।

सामाजिक मेलजोल को टालना

  • हो सकता है आपका बच्चा पारंपरिक धौंस के साथ-साथ साइबर धौंस भी झेल रहा हो।

स्कूल में निरंतर खराब प्रदर्शन।

बच्चों के साथ खुले तरीके से आलोचना करें। यह स्कूलों / शिक्षा संस्थानों और माता-पिता सब पे लागू होता है। अगर आपका बच्चा आपको यह बताता है कि वह इस तरह की किसी घटना का शिकार है, तो हो सकता है कि वह मानसिक रूप से इसको लेकर काफी परेशान है। आपको यह निर्णय लेना है कि आप इसपर किस तरह से प्रतिक्रिया दिखायेंगे, लेकिन पहले यह तय कर लें कि आप ऐसा शांतिपूर्वक तरीके से करेंगे। कुछ परिस्थितियों में धौंस दिखाने वाले बच्चे के अभिभावक को इस विषय में बताने से स्थिति और भी खराब हो सकती है। क्योंकि वह बच्चा अपने माता-पिता या शिक्षक द्वारा इसके लिए दण्डित किया जा सकता है और इसका बदला वह आपके बच्चे को और डराकर ले सकता है। बहुत से माता-पिता यह मानना नहीं चाहते हैं कि उनका बच्चा दूसरों को डराता-धमकाता है। इसलिए वे इस समस्या को खारिज कर सकते हैं। आपको अपने निर्णय के आधार पर सही योजना बनानी होगी, पीड़ित की मानसिक दशा को ध्यान में रखते हुए।

अगर आप या आपके आसपास कोई साइबर धौंस का शिकार है तो हमारे सहयोगी हेल्पलाइनों पर तुरंत संपर्क करें।

आई कॉल
022-25521111
परिवर्तन
080- 65333323
सहाय
080 – 25497777
सुमैत्री
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