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डिप्रेशन (अवसाद) क्या है?

केवल हताशा या उदासी महसूस करना ही अवसाद नहीं है। यह वास्‍तव में मानसिक स्वास्थ्य की समस्या है, जो जीवन से जुड़ी उन परेशानियों के कारण होती हैं जिनके बोझ तले आप दबा महसूस करते हैं।

यह उदासी से इस मायने में अलग है कि जहां उदासी में थोड़े समय तक विषाद होता है वहीं अवसाद कम से कम 2 सप्ताह तक बना रह सकता है। अवसाद की गंभीरता को इस तथ्य से समझा जा सकता है कि यह आपको इस तरह जड़ बना देता है कि फिर कुछ भी काम करने कि आपकी इच्छा नहीं होती। यह अवस्था कठिन और दर्दनाक हो सकती है, लेकिन इससे पार पाना असंभव नहीं है। मदद उपलब्ध है और थोड़ा प्रयास करके आप अपने जीवन से अवसाद को दूर भगा सकते हैं।

अवसाद से प्रभावित 25% लोग परामर्श नहीं लेते और चुपचाप इसकी पीड़ा भोगते रहते हैं। भरपूर देखभाल, प्यार और अपने घनिष्ठ लोगों की समझ से तथा सही इलाज और साइकोथेरेपी से आप निश्चित ही इससे उबर जाएंगे और आपका जीवन फिर से खुशहाल हो जाएगा।

अवसाद के प्रकार

आप किस प्रकार के अवसाद का सामना कर रहे हैं, उसे समझना, ठीक होने की दिशा में पहला कदम है। इनके बारे में अधिक जानकारी के लिए आगे पढ़े।

अवसाद संबंधी विकार मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं:

1

मेजर डिप्रेसिव डिसआर्डर

यूनिपोलर या मेजर डिप्रेशन तब माना जाता है जब आपमें अवसाद के पांच या अधिक लक्षण पाए जाते हैं। ऐसे में कार्य करने, सोने, अध्ययन करने, खाने और सामान्य अनुभव की क्षमताएं बाधित या कम हो जाती हैं।

2

उपचार प्रतिरोधी अवसाद (ट्रीटमेंट रेसिस्टेंट डिप्रेशन)

यह स्थायी या पुराना हो सकता है और इसमें अवसाद निवारक दवाएं काम नहीं करतीं। समस्या की प्रकृति और गंभीरता के अनुसार ऐसे में प्रायः इलेक्ट्रोकन्वल्सिव थेपेरी (ईसीटी) का प्रयोग किया जाता है।

3

स्थायी अवसाद विकार (क्रोनिक डिप्रेसिव डिसऑर्डर)

यह लक्षण कम से कम दो साल तक रहता है जिस दौरान आप अवसाद के गंभीर दौरों से प्रभावित होते हैं तथा इसके साथ ही अवसाद के कम से कम दो अन्य लक्षणों से भी पीड़ित होते हैं।

अवसाद का यह स्थायी स्वरूप जो कि डिस्थाइमिया या मनस्ताप भी कहलाता है, आपकी कार्य करने की क्षमता को बाधित करता है।
अवसाद के कई अन्य प्रकार भी होते हैं।

निराशा के कई अन्य प्रकार भी होते हैं।

  • अवसाद के संकेत और लक्षण
  • अवसाद के कारण
  • निदान और उपचार

अवसाद के लक्षणों की गंभीरता, आवृत्ति तथा सीमा, व्यक्तियों तथा उनकी बीमारियों के अनुसार अलग-अलग रहती है। यद्यपि अवसाद के विकारों से पीड़ित कोई दो व्यक्ति एक जैसे लक्षण अनुभव नहीं करते, लेकिन निम्न संकेतों से इसका जल्दी पता लगाने में मदद मिलती हैः

ज्यादा बेचैनी, ब्यौरे याद करने में तथा फैसले लेने में कठिनाई

 

अनिद्रा, सुबह जल्दी जागना या देर तक सोना

अपराधबोध, निरर्थकता, और/या असहायता की भावनाएं

 

नाउम्मीदी का अहसास और/या निराशा

अधिक भोजन करना/वजन में वृद्धि या भूख/वजन की कमी

 

थकान, और ऊर्जा की कमी

यौन क्रिया सहित दूसरी आनंद देने वाले कामों या शौकों में रूचि खत्म हो जाना

 

जीवन में आनंद न रह जाना

चिड़चिड़ापन और अधीरता

 

स्थायी पीड़ाएं या दर्द, सिरदर्द, ऐंठन, या पाचन की समस्याएं

स्थायी उदासी, व्यग्रता या 'खालीपन' की भावनाएं

 

आत्महत्या के विचार आना या आत्महत्या का प्रयास करना

अवसाद उत्पन्न करने वाले कारणों के मामले में, यह समझना और मानना ज़रूरी है कि अवसाद में कोई  विशेष कारण या सिद्धांत नहीं होता। किसी व्यक्ति के अवसाद से ग्रसित होने की वजह – आनुवंशिक हो  भी सकती है या नहीं भी हो सकती है।  

अवसाद के विकार, कई तरह के जैविक-मनोवैज्ञानिक-सामाजिक व कुछ अन्य कारकों की वजह से होते हैं:

स्वास्थ्य समस्याएं

कैंसर, थायराइड की समस्याएं, पुराना दर्द, स्ट्रोक, दिल का दौरा, पार्किंन्सन रोग, शिरा रोग, अल्ज़ाइमर  रोग, मायोकार्डियल रोगों के साथ जुडी बीमारियाँ, मधुमेह, कूल्हे में फ्रैक्चर, तथा हार्मोन की गड़बडि़यां आदि अवसाद पैदा कर सकते हैं।

इससे व्यक्ति अपनी खुद की शारीरिक और मानसिक ज़रूरतों के प्रति लापरवाह हो जाता है और इसलिए ठीक होने में अधिक समय लग जाता है।

 

शारीरिक

  • नॉरएपिनेफ्रिन, डोपामीन, और सेरोटोनिन जैसे हार्मोन तंत्रिका संचार को प्रभावित करते हैं।
  • अवसाद ग्रस्त  लोगों के दिमाग की ली गई छवियों में बनावट में फर्क जैसे कि आर्बिटोफ्रंटल कार्टेक्स, पुटामेन और थैलमस व हिप्पोकैम्पल आयतन भार में कमी पाई गयी है; हालांकि अभी इस बारे में ठोस निष्कर्ष नहीं निकाला जा सका है कि क्या ये अंतर अवसाद संबंधी विकारों के कारण ही उत्पन्न होते हैं।
  • पुराने तनाव से एडजस्ट न कर पाना, जो लोगों के एंडोक्राइन सिस्टम में बदलाव कर देता है।
  • इसके अलावा, अनेक स्वास्थ्य समस्याओं कों भी अवसाद संबंधी विकारों का कारण माना जाता है।

मनोवैज्ञानिक

कम आत्म-प्रतिष्ठा, तनाव के दबाव में आना, तथा व्यक्तित्व के विकार, अवसाद उत्पन्न करने वाले कुछ ठोस मनोवैज्ञानिक कारण हैं। हालांकि ये अवसाद के बजाय एकदम शुरूआती संकेत हो सकते हैं।

 

सामाजिक

जीवन में विपरीत बदलाव, आयु (पुरूषों व महिलाओं के लिए भिन्न), लिंग, पारिवारिक समस्याएं, बच्चे, विवाह, तलाक, किसी बीमार परिजन से निकटता, सामाजिक - आर्थिक स्थिति, अतीत में कोई हादसा या दुर्व्यवहार, भेदभाव, अलगाव, रिश्ते निभाने में कठिनाई, कार्य या स्कूल में तनाव आदि कुछ ऐसे सामाजिक कारण हैं जो अवसाद में असर डालने वाले माने जाते हैं। जीवन में सकारात्मक परिवर्तन जैसे कि नौकरी बदलना आदि भी अवसाद को प्रेरित कर सकते हैं।

लिंग / जेंडर 

अपनी शारीरिक संरचना के कारण महिलाओं की अपेक्षा पुरूष अवसाद की चपेट में कम आते हैं क्योंकि महिलाओं को मासिक स्राव, गर्भधारण और मेनोपॉज के समय हार्मोन के कई बदलावों का सामना करना पड़ता है।

 

आयु

यद्यपि बच्चे, किशोर और युवा सभी में अवसाद पाया गया है, लेकिन बुजुर्गों के लिए इसका खतरा  ज्यादा रहता है।

आनुवंशिक

अवसाद के लगभग 30-40% लक्षण आनुवंशिक पूर्व-स्थितियों के कारण होते हैं। हालांकि अतिरिक्त कारण जैसे कि घर में, कार्य स्थल या स्कूल में तनाव भी यह प्रेरित करते हैं।

 

हादसा और दुख

शारीरिक या भावनात्मक दुर्व्यवहार या किसी मित्र या प्रियजन की मृत्यु प्रायः अवसाद पैदा कर सकती है। ऐसी स्थितियों में अत्यधिक दुख तथा शारीरिक कमजोरी अवसाद का कारण बनती है।

दवाएं और मादक पदार्थ 

निर्दिष्ट दवाएं, शराब या मादक पदार्थ किसी व्यक्ति में अवसाद उत्पन्न कर सकते हैं। इसके अलावा कुछ खास दवाएं जिनका सेवन यदि बताई गयी दवाओं के साथ किया जाए तो वे बताई दवाओं के असर में बाधा पहुंचाकर लक्षण बढ़ा सकती हैं। दवाएं ज़रूरी होने पर सावधानी अवश्य रखें। 

ठीक होने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए, अवसाद का पता लगना महत्त्वपूर्ण है। प्रायः गलत दवाएं व परामर्श लेने से अवसाद से पीड़ित व्यक्ति और भी गंभीर हो जाता है। किसी चिकित्सक तथा किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से पेशेवर सहायता लेना, सही शुरूआती कदम है।

आपमें जिस प्रकार का अवसाद पाया गया है तथा वह जिस स्तर पर है, उसके अनुसार उपचार की शुरूआत की जाती है।

यह याद रखना ज़रूरी है कि अपने परामर्शदाता के साथ 'बातचीत आधारित उपचार' में भाग लेंI आपकी समस्या ठीक करने के लिए यह बहुत महत्त्वपूर्ण है कि आप उन्हें सब कुछ खुल कर बताएं ताकि वह भावनात्मक प्रतिरोध को पार कर सके ।

अवसाद विकारों का अनुभव करने वाले व्यक्तियों को निम्न चीज़ें दी जा सकती हैं:

दवाएं

 

ट्राइसाइक्लिक्स (पुराने अवसाद निवारक)

मोनोऐमीन ऑक्सीडेज इनहिबिटर्स (एमएओआई)

 

अवसाद निवारक

मनोचिकित्सा (साइकोथेरेपी)

 

आपसी (अंतर्वैयक्तिक ) उपचार

साइकोडायनेमिक थेरेपी

 

 

बोधात्मक व्यवहारगत उपचार

इलेक्ट्रोकन्वल्सिव थेरेपी (ईसीटी)

 

वेगस नर्व स्टिमुलेशन (वीएनएस) और रिपीटिटिव ट्रांसक्रेनियल मैग्नेटिक स्टिम्युलेशन (आरटीएमएएस)

quiz-bulb

हममें से बहुत से लोग कभी न कभी उदास, हतोत्साहित या निराश महसूस करते हैं, लेकिन कुछ लोगों में यह मनोदशा बदलती नहीं है। अगर लम्बे समय से आप ऐसा ही महसूस कर रहे हैं और यह आपके दैनिक जीवन में शामिल हो गया है तो शायद आप अवसाद में हैं। उस समय अपने जीवन के विविध पहलुओं का मूल्यांकन करने के लिए यह अच्छा तरीका है। इससे यह पहचानने में मदद मिल सकती है कि आप में अवसाद के चिंताजनक लक्षण तो नहीं हैं और अपने लिए उचित मदद पाने के लिए क्या करें।

प्रश्नोत्तरी हल करें।

अस्वीकरणः यह टेस्ट केवल अवसाद के लक्षणों का संकेत देने और यह समझने के लिए है कि क्या आगे जांचें कराने की ज़रूरत होगी? यह किसी भी प्रकार से पेशेवर जांच नहीं है, उसके लिए आपको किसी सुयोग्य डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ को दिखाना होगा, जिसे आप यहां खोज सकते हैं।

  • मैं अपनी सहायता किस प्रकार कर सकता हूं?
  • अवसाद के साथ मौजूद रहने वाली समस्याएं
  • मैं अवसाद से पीड़ित किसी अन्य व्यक्ति की किस प्रकार सहायता कर सकता हूं?

अवसाद की गिरफ्त में आने पर व्यक्ति इसे तुरंत नहीं समझ पाता। प्रायः वह अत्यधिक थकावट, असहायता, और अपने जीवन में नाउम्मीदी महसूस करता है। पसंदीदा काम अब कर पाना या किसी से  बातचीत करना अब लगभग असंभव लगने लगता है। अवसाद को एकाएक दूर नहीं किया जा सकता, इसलिए आपको प्रसन्न रहने के लिए अपेक्षाकृत छोटी कोशिशों से शुरूआत करनी होगी, और फिर उसके बाद बड़े लक्ष्यों की दिशा में प्रयास करने होंगे :

यथासंभव पेशेवर मदद लेने की कोशिश जल्द से जल्द करें।

 

नकारात्मक सोच से बचें।

सक्रिय रहने का प्रयास करें - व्यायाम करें, फिल्म देखने जाएं, कोई खेल खेलें या अन्य गतिविधि करें जिसमें आपको कभी आनंद आता था।

 

उम्मीद रखें कि आपकी मनोदशा में धीरे-धीरे सुधार होता जाएगा, और यह तुरंत नहीं सुधरेगी।

बड़े कार्यों को छोटे-छोटे स्तरों में बांटकर अपने लिए सही लक्ष्य तय करें।

 

कुछ प्राथमिकताएं तय करें और जो आप कर सकते हैं वह करें।

अन्य लोगों के साथ समय बिताएं चाहे यह आपको चिड़चिड़ाहट भरा लगता हो, किसी भरोसेमंद मित्र या रिश्तेदार का सहारा लें, उनसे दिल कि बात करें और खुद को अलग-थलग ना  करें।

 

आपकी नींद और भूख में सुधार होने पर सकारात्मक रहें।   

शादी करना या तलाक लेना या नौकरी बदलने जैसे महत्त्वपूर्ण फैसले टाल दें।

 

अवसाद के बारे में अधिक जानकारी लेते रहें।

अवसाद और अन्य बीमारियां प्रायः आपस में सम्बंधित होतीं हैं, अर्थात शारीरिक बीमारी अवसाद को जन्म दे सकती है या इसका उल्टा भी हो सकता है। किसी गंभीर शारीरिक बीमारी के दौरान कुछ हताशा महसूस करना सामान्य बात है, लेकिन यदि यह दो सप्ताह से अधिक समय तक बनी रहे, तो इस पर ध्यान देना चाहिए। अवसाद के साथ मौजूद रहने वाली सामान्य समस्याएं निम्न हैं: 

व्यग्रता विकार

संत्रास या पैनिक डिसआर्डर, ऑब्सेसिव कम्पल्सिव डिसआर्डर, आघात के पश्चात् तनाव, सोशल फोबिया या सामान्य व्यग्रता, कुछ ऐसे विकार हैं जो अवसाद के साथ पाए जाते हैं।

 

ह्रदय रोग

ह्रदय रोगों से पीड़ित 18-26% लोग और स्ट्रोक के 30-50% रोगी इस मानसिक बीमारी से ग्रस्त हो सकते हैं। तनाव, खराब जीवनशैली तथा अपने प्रति लापरवाही, दिल के रोग और अवसाद उत्पन्न करने में योगदान देती है।

कैंसर

अवसाद विकार कैंसर रोगियों में तब दिखता है जब यह उनकी दैनिक गतिविधियों को सीधे प्रभावित करता है, सामाजिक रिश्तों में बाधा पहुंचाता है, अत्यधिक दर्द या थकावट उत्पन्न करता है आदि।

 

मधुमेह (डायबिटीज)

अवसाद और डायबिटीज का एक विषम चक्र है जो सही समय पर ध्यान न देने से नुकसान पहुंचा सकता है। डायबिटीज के कारण मन अशांत हो जाता है जिससे अवसाद उत्पन्न होता है, जिसकी वजह से व्यक्ति प्रेरणाहीन हो जाता है और इससे रक्त में शुगर का स्तर बढ़ता है, ज्यादा थकावट, आलस्य होता है। मनोदशा ज्यादा खराब हो जाती है और यहां तक कि अवसाद और गंभीर हो जाता है।

एचआईवी/एड्‌स

एचआईवी/एड्‌स से जुड़ा सामाजिक कलंक, व्यक्ति में गहरा अवसाद उत्पन्न करता है। प्रायः दोहरी शर्मिन्दगी से खुद को बचाने के प्रयास में लोग मादक पदार्थों का सेवन करने लगते हैं जिससे उनकी दशा और भी बिगड़ जाती है। अपेक्षाकृत नए और बेहतर उपचार यह सुनिश्चित करते हैं कि व्यक्ति को उन्नत व अपेक्षाकृत स्वस्थ जीवनशैली जीने का अवसर मिले।

 

थायराइड

प्रायः व्यग्रता, शारीरिक और मानसिक सुस्ती का संबंध हाइपर और हाइपोथायराइड से होता है। इसलिए, अवसाद विकार की अतिरिक्त पहचान आवश्यक है ताकि सही इलाज हो सके।

यौन विकार

पहले से पाई गई अवसाद समस्या जीवन में अरुचियां पैदा कर सकती है जिनमें यौन गतिविधियां भी शामिल हैं, जबकि बेडरूम में सही प्रदर्शन न कर पाने से व्यक्ति का आत्मविश्वास हिल जाता है और वह अवसाद का शिकार होने लगता है।

 

पीएमएस

हालांकि यह चकित करता है, लेकिन प्री-मेंस्ट्रुअल डिस्फोरिक डिसआर्डर (पीएमडीडी) या प्री-मेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (पीएमएस) ऐसी समस्या है जो हर 20 में से 1 महिला को उसके मासिक चक्र के दौरान प्रभावित करती है।

इसमें चिड़चिड़ापन, अस्थिर मनोदशा, विलाप के दौरे तथा शारीरिक शिकायतें जैसे कि पेट फूलना, सिरदर्द, सुस्ती और भूख में बदलाव आदि लक्षण होते हैं।

आहार में परिवर्तन, विश्राम तथा व्यायाम करने और परामर्श लेने से अधिकतर मामलों में मदद मिलती है। अवसाद निवारक दवाओं या हार्मोन वाले उपचारों से गंभीर मामलों में लाभ पहुंचता है।

पाचन के विकार

उपेक्षित खान-पान, तनाव वाले हार्मोन और पाचक एसिड की अधिकता अवसाद के दौरान पाचन की समस्याएं उत्पन्न कर सकते हैं।

दूसरी ओर, अवसाद इन्फ्लेमेटरी बावल डिजीज (आईबीडी), क्रोह्न्स रोग और अल्सरेटिव कोलाइटिस (आंतों में अल्सर) भी पैदा कर सकता है।

 

मादक पदार्थों की लत

मानसिक बीमारी, मादक पदार्थों की लत पैदा कर सकती है तथा इसका उल्टा भी हो सकता है। अवसाद ठीक करने के लिए नींद बढ़ाने या मन को शांत करने वाली दवाएं, शराब व अन्य मादक पदार्थों का सेवन, व्यक्ति को सीधे नुकसान पहुंचाता है और जटिल अवसाद विकारों को बढ़ाता है।

यदि आप अपने किसी परिचित या घनिष्ठ को अवसाद से ग्रसित पाएं, तो आप उसके लिए जो तीन महत्त्वपूर्ण कार्य कर सकते हैं वो हैं, उसे प्यार और सहारा देना और समुचित पेशेवर सहायता लेने के लिए उसे प्रेरित करना।

भावनात्मक सहारा दें, समझें, धैर्य रखें और प्रोत्साहन दें।

 

उससे बात करें, उसे उसकी बात पूरी करने दें और ध्यानपूर्वक सुनें।

कभी भी उसकी भावनाओं को नकारें नहीं या उसके दर्द को कमतर न आंकें।

 

आत्महत्या के विचारों को कभी अनदेखा न करें। उनके बारे में अपने प्रियजन के उपचारक को बताएं।

अपने प्रियजन के साथ बाहर टहलने या घूमने जाये तथा अन्य कामों में भाग लेने के लिए आमंत्रित करें जिनमें कभी उसे आनंद आता था, लेकिन सावधानी रखें कि यदि वह अनिच्छुक हो तो ज्यादा दबाव न डालें।

 

वह आग्रह करे तो उसके साथ उपचारक के पास जाएं।

अपने प्रियजन को आश्वस्त करते रहें कि समय के साथ तथा सही परामर्श से वह अपने अवसाद से छुटकारा पा लेगा।

 

अपने प्रियजन से रूखा बर्ताव न करें, उसके कठिनाई के दौर से गुजरते समय सलाह दें और तुलनाएं ना करें।

उसे हंसाएं और यह अहसास कराएं कि आप उसकी परवाह करते हैं, और उसे अपनी सामर्थ्य की याद दिलाएं।

 

उसे पेशेवर सहायता प्राप्त करने के लिए राजी करें।

यदि उसमें आत्महत्या की प्रवृति, भ्रान्ति या मिथ्यभाव हों तो उसे अस्पताल में भर्ती करने की व्यवस्था करें।

 

उस व्यक्ति का साथ न छोड़ें- हो सकता है उसे अपने आस-पास के लोगों से बार-बार इस आश्वासन की ज़रूरत हो कि वह बेहतर महसूस करने का अधिकारी है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हां, नैदानिक अवसाद एक गंभीर, लेकिन उपचार योग्य मानसिक बीमारी है। यह कोई निजी कमजोरी न होकर एक चिकित्सकीय समस्या होती है।

गंभीर अवसाद का शिकार रहे व्यक्ति के लिए भविष्य में अवसाद के प्रकोप का जोखिम ज्यादा रहता है, लेकिन अवसाद से ठीक हो चुका हर व्यक्ति फिर से इसका शिकार नहीं बनता। ठीक होने के लिए सही उपचार कराना ज़रूरी है जिससे किसी भावी अवसाद की रोकथाम या पहचान करने में भी मदद मिलती है। 

उपचार न किए जाने पर, विविध प्रकार के अवसाद विकार महीनों या कभी-कभी वर्षों तक बने रहे सकते हैं। गंभीर अवसाद होने पर विशेष लक्षण उभरते हैं जो आमतौर से कुछ महीनों तक बने रहते हैं। मौसमी अवसाद या एसएडी, प्रायः जाड़ों के महीनों में रहता है और बसंत या गर्मी की ऋतु की शुरुआत के साथ इसमें सुधार हो जाता है। बाइपोलर डिसआर्डर में 'अप्स' (उन्माद के दौरे) तथा 'डाउन' (चरम अवसाद के दौरे) होते हैं। हालांकि ये अवस्थाएं तेजी से या धीमी गति से बदल सकती हैं, लेकिन बाइपोलर अवसाद तब तक बना रह सकता है जब तक इसका कारगर इलाज न किया जाए। डिस्थाइमिया में मामूली लक्षण होते हैं जिसकी पहचान करना अधिक कठिन होता है, और इसका उपचार न कराने पर यह वर्षों तक बना रह सकता है।

वैकल्पिक उपचार विधि कोई ऐसा उपचार या तकनीक होती है जिसका वैज्ञानिक प्रमाण न हो कि वह किसी विशेष समस्या के लिए सुरक्षित या कारगर है। वैकल्पिक उपचार विधि में कई उपचार धाराएं शामिल हैं जिनमें आहार और व्यायाम, से लेकर मेंटल कंडीशनिंग और जीवनशैली में परिवर्तन तक शामिल हैं। अवसाद के इलाज में इनमें से कुछ कारगर पाए गए हैं। योग, एक्यूपंक्चर, गाइडेड इमेजरी, काइरोप्रैक्टिक केयर, हिप्नोसिस, बायोफीडबैक, एरोमाथेरेपी, रिलैक्सेशन, हर्बल उपचार, मालिश व अन्य, इन वैकल्पिक उपचार विधियों के उदाहरण हैं। यदि आप इनमें से कुछ आजमाना चाहते हों तो अपने डॉक्टर से बात कर लें। 

पुरूषों की तुलना में महिलाओं में अवसाद दोगुना पाया जाता है। महिलाओं के हार्मोन स्तरों में होने वाले कई परिवर्तन, इसका कारण हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, गर्भावस्था और मेनोपॉज के समय तथा प्रसव के बाद, गर्भपात के बाद या हिस्टेरेक्टमी के बाद अवसाद आम बात है - ये ऐसे दौर होते हैं जब महिलाएं अपने हार्मोन स्तर में अस्थिरता अनुभव करती हैं। प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (पीएमएस), तथा पीएमएस का चरम रूप प्रिमेंस्ट्रुअल डिस्फोरिक डिसआर्डर (पीएमडीडी), भी अवसाद उत्पन्न कर सकती हैं।

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