search
Live Love Laugh Logo

कई बार आपको दोबारा पूछने की जरुरत होती है।
जब एक मुस्कान के पीछे अवसाद छुपा होता है।
जब आपको पता है कि ’मैं ठीक हूं, धन्यवाद” ये सच नही है।
जब चुप्पी में शब्द खो जाते हैं।

इसीलिये #DobaraPoocho – क्योंकि फिर से पूछने पर हो सकता है अवसाद थोडा और सहन करने लायक हो जाए।

#DobaraPoocho

"आप कैसे हैं?" "क्या आप ठीक हैं?" "आपका दिन कैसा बीता?" "क्या चल रहा है?"

हम सभी अभिवादन के रुप में इस तरीके के प्रश्न अक्सर पूछते रहते हैं। इसके उत्तर की अपेक्षा भी हमेशा वही घिसा पिटा औपचारिक वाक्य ही होता है। बहुत कम होता है जब वास्तव में यह बोलचाल का भाग होता है – सामान्य रुप से तो पूछकर उसी समय भूल जाने वाली बात हो जाती है।

आप वाकई आश्चर्य करेंगे और आपको धक्का लगेगा यदि इन सवालों के ईमानदार उत्तर सामने वाला व्यक्ति अपनी वास्तविक स्थिति के अनुसार देने लगे!

हमने कितनी बार पूरे मन से अपने दोस्त, सहकर्मी या प्रियजन को यह पूछा है और उनके खुले और सच्चे मन से दिये गए उत्तर की प्रतीक्षा की है? औपचारिक प्रश्न और उनके उतने ही औपचारिक उत्तर मिलने से हमें ऊपरी तौर पर सब कुछ सही होने का पता चलता है, लेकिन इसका सच तो मुखौटो के पीछे होता है, प्रत्येक चार में से एक भारतीय अवसाद और व्यग्रता का शिकार है।

यह ऎसी बात नहीं है कि हमें केवल अवसाद को लेकर जागरुक होने की जरुरत है लेकिन सही बात यह है कि हम सभी को अवसाद के साथ मुकाबला करने का अधिकार है और हम सभी को एक दूसरे की मदद करनी चाहिये जब उन्हें इसकी वाकई जरुरत हो।

“दोबारा पूछो” की शुरुआत इसी तरह की जरुरत के चलते हुई थी जब किसी को ध्यान से निरीक्षण करने पर उसकी स्थिति का पता चलता है, व्यक्ति को अपने पास और खुला होने के लिये स्थिति उपलब्ध करवाने की जरुरत होती है। फिर से पूछने की जरुरत होती है।

अवसाद की स्थिति

ट्विटर पर चर्चा में भाग लें

इस पहल का भाग बनें – हमें फेसबुक पर लाईक करें

प्रेस कवरेज

NDTV-India Questions Deepika Padukone: A Dialogue On Mental Health

October 10, 2016

अभिनेत्री दीपिका पादुकोण एनडीटीवी स्टूडियो में सोमवार को आई थी, उस दिन विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस भी था जहां पर उन्होंने कहा कि पिछले साल से, जब से उन्होंने अपने अवसाद के साथ लड़ाई शुरु की है, उनका जीवन एकदम बदल गया है।

ज़ी न्यूज – दीपिका पादुकोण का कहना है कि मानसिक रोग का प्रमुख कारण है स्टिग्मा या गलत सोच

अक्टूबर 10, 2016

राष्ट्रीय स्तर के मानसिक असामान्यता संबंधी जागरुकता अभियान के प्रस्तुतिकरण पर बोलते हुए विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर, बॉलीवुड अभिनेत्री ने कहा: “वह दिन, जब हम मिलकर इस जागरुकता के साथ होंगे, तब हम ’इस युद्ध को जीत लेंगे।“

मुखौटे के पीछे क्या है: एक कविता

अवसाद के विरुद्ध, एक दूसरे के साथ

साथ मिलकर हम भावनात्मक समस्याओं से परेशान बहुत से लोगों की मदद कर सकते हैं। हर एक छोटे से छोटा दान भी बदलाव ला सकता है।

दान करें और एक सकारात्मक बदलाव लाएं

हेल्पलाइन संबंधी अस्वीकरण

द लिव लव लाफ फाउन्डेशन (टीएलएलएलएफ) किसी व्यवसाय में शामिल नही है जिसमें सलाह प्रदान की जाती है, साथ ही वेबसाइट पर दिये गए नंबरों का परिचालन, नियंत्रण भी नही करता है। हेल्पलाइन नंबर केवल सन्दर्भ के प्रयोजन से है और टीएलएलएलएफ द्वारा न तो कोई सिफारिश की जाती है न ही कोई गारंटी दी जाती है जो कि इन हेल्पलाइन्स पर मिलने वाली चिकित्सकीय सलाह की गुणवत्ता से संबंधित हो। टीएलएलएलएफ इन हेल्पलाइन्स का प्रचार नही करते और न ही कोई प्रतिनिधि, वारंटी या गारंटी देते हैं और इस संबंध में कोई उत्तरदायित्व नही लेते हैं जो सेवाएं इनके माध्यम से प्रदान की जाती हैं। टीएलएलएलएफ द्वारा इन हेल्पलाइन नंबर पर किये जाने वाले कॉल के कारण होने वाले किसी भी नुकसान की जिम्मेदारी से स्वयं को अलग किया जाता है।