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भावनाएं क्या हैं?

भावनाएं हर किसी में होती हैं पर इन अहसासों को पारिभाषित करना कठिन है। भावनाएं या अहसास ऐसे शब्द हैं जो अलग-अलग समय और परिस्थितियों में मन, मस्तिष्क और शरीर में होने वाले जटिल परिवर्तनों को बताने के लिए अदल-बदल कर प्रयोग किए जाते है।

डर, गुस्सा, खुशी, उदासी, जलन, शांति – ये सभी भावनाएं हैं, जो हमारे मन और शरीर में महसूस होती हैं।

मान लीजिए आप रात में सुनसान सड़क से गुजर रहे हैं और आपको पीछे कदमों की आहट सुनाई देती है। उस परिस्थिति में आपका शरीर हार्मोन और न्यूरोकेमिकल, जैसे कि एड्रीनलीन, रिलीज करके प्रतिक्रिया करता है। दिल की धड़कन बढ़ने के साथ सांस तेज हो जाती है, पेट तन जाता है और आपका मन घबराहट महसूस करता है – जिसे आप भय या डर कहते हैं ।

या, जब आप अपने बच्चे को देखते हैं, आप मुस्कराते हैं, आप की धड़कन आराम से चलती है, आपका शरीर और सांस की गति भी आरामदेह स्थिति में हो जाती है और मस्तिष्क में ऑक्सीटोसिन रिलीज होता है। इसी प्रकार के अन्य परिवर्तन भी होते हैं।

भावनाएं और अनुभूतियाँ हमारे जीवन की दिशा और दशा तय करती हैं, चाहे हम इसे समझ न पाते हों। भावनाएं हमें निर्णय करने के लिए प्रेरित करती हैं। वे हमें साहसी या सतर्क बनाती हैं। हम अपनी गतिविधियां और शौक भी अपनी भावनाओं के आधार पर ही चुनते हैं। अनुभूतियाँ, जिन्हें हम भावनाएं भी कहते हैं, यह तय करती हैं कि हम लोगों, स्थानों, परिस्थितियों के प्रति किस तरह से प्रतिक्रिया करते हैं। भावनाएं और जज़्बात ही हमारे काम, जीवनसाथी, ज़िंदगी जीने के तरीके और अंत में जीवन के सारे अनुभवों तक हर चीज़ को प्रभावित करती हैं। इसलिए, यदि हम शांति, प्रसन्नता और स्पष्टता से भरपूर जीवन जीना चाहते हैं, तो भावनाओं को ठीक तरह से समझना बहुत ज़रूरी है।

दुर्भाग्य से मौजूदा समाज में लोग अपनी भावनाओं से कट गए हैं और हमारे स्कूल भी हमें यह नहीं सिखाते कि भावनाओं को कैसे समझें और कैसे उनका सामना करें। लम्बे समय तक इस तरह का वातावरण हमें तनाव और अवसाद, या डिप्रेशन, में ले जाता है। अपनी भावनाओं तथा अपने आस-पास के लोगों की भावनाओं को सही तरीके से समझने से हम वास्तविक रूप से ख़ुशी और पूर्णता पा सकते हैं।

वे हमें किस तरह प्रभावित करते हैं?

हमारी भावनाएं केवल हमारे दिलोदिमाग में से ही जुड़े हुए नहीं हैं। वे हमारे शरीर और स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती हैं। स्वभाव से, ये भावनाएं संक्रामक होती हैं और अपने उतार-चढाव से वातावरण को प्रेरित करती हैं। वे हमारे आस-पास के लोगों के मन, शरीर और स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं। एक दूषित दिमाग अपनी हरकतों से व्याकुलता, भय और घृणा को प्रेरित कर सकता है, उसी तरह जैसे कि मुस्कराहट ख़ुशी फैलाती है। शोध बताते हैं कि सकारात्मक भावनाएं और जीवन के बारे में आशावादी दृष्टिकोण रखने वाले लोग, शिकायती और निराशावादी लोगों की अपेक्षा, ज्यादा खुश रहते हैं, अधिक जीते हैं, और अधिक पूर्णता महसूस करते हैं।

भावनाएँ और इनके प्रकार

शिशुओं के चेहरे की अभिव्यक्तियों में 7 मौलिक भावनाएं दिखाई देती हैं।

ख़ुशी

ख़ुशी

प्राप्ति की आशा

चकित

चकित

अप्रत्याशित घटना

गुस्सा

गुस्सा

तत्काल न्याय और कार्रवाई की मांग

घृणा

घृणा

मलिनता, विषाक्त संपर्क

अपमान

अपमान

निम्नस्तरीय व्यवहार या व्यक्ति

डर

डर

खतरे की आहट

दुख

दुख

हानि की आशंका

हमारे जीवन में भावनाओं के वास्तविक उपयोग क्या हैं ?

हमें अपने लक्ष्य और ज़रूरतें पूरी करने के लिए ऊर्जा और प्रेरणा देना, भावनाओं का वास्तविक काम होता है। वह वास्तव में किसी दी गई परिस्थिति में हमारी प्रदर्शन-क्षमता सुधारने में सहायक होती हैं। वे हमें एक-दूसरे को बेहतर समझने में मदद करती हैं।

अपनी भावनाओं को कैसे संभालें

उनकी पहचान करें

उनकी पहचान करें

अपनी भावनाओं की पहचान करना, उन्हें संभालने की दिशा में पहला कदम है। भावनात्मक बुद्धिमत्ता बढ़ाने के लिए अपनी भावनाओं को पहचान लेने पर आप उन पर प्रतिक्रिया करना भी सीख जाते हैं।

उनकी निगरानी करें

उनकी निगरानी करें

अपनी भावनाओं की निगरानी करना शुरू करें। इसे समझें कि कौन सी बातें आपके आनंद, दुख, तिरस्कार या क्रोध को बढ़ाती हैं।

कारण पूछें

कारण पूछें

अपने अंदर इस अहसास की वजह के बारे में सोचें। खुद से पूछें, 'मेरे साथ अभी यह जो हो रहा है, उसमें क्या गलत या सही है? मुझे ऐसा क्यों महसूस हो रहा है?' आपने जिस तरह से प्रतिक्रिया की, उसके कारणों के बारे में शुरुआत से पूरी तरह समझने का प्रयास करें।

नियंत्रण अपने हाथ में लें

नियंत्रण अपने हाथ में लें

अपनी भावनाओं को अपनी प्रतिक्रियाओं पर हावी न होने दें। आपके विचार सीधे आपकी भावनाओं से जुड़ते हैं, इसलिए यदि आप खराब महसूस कर रहे हैं, तो इसकी सर्वाधिक आशंका है कि आपमें चल रहा कोई नकारात्मक विचार आपको ऐसा महसूस करा रहा है, और उसकी नकारात्मक प्रतिक्रिया ही होगी। परिस्थिति पर विचार करने के अन्य संभव तरीकों के बारे में सोचें, और आप तुरंत बेहतर महसूस करेंगे।

अनुक्रिया करें, प्रतिक्रिया नहीं

अनुक्रिया करें, प्रतिक्रिया नहीं

अब जबकि आपको पता है कि आपको किस भावना का सामना करना है, तो आप अनेक तरीके से अनुक्रिया कर सकते हैं। पीछे हटना और प्रतिक्रिया से मना करना भी इसमें शामिल है। जो आप आमतौर से करते, आप उसके विपरीत करने की भी कोशिश कर सकते हैं, और यदि आपको लगे कि इससे मदद मिले तो आप खुद को परिस्थिति से बाहर भी रख सकते हैं. लेकिन सदैव यह सुनिश्चित करें कि आपकी अनुक्रिया, सोचा-समझा हुआ विकल्प होना चाहिए और यह अनैच्छिक प्रतिक्रिया न हो।

दूसरों की भावनाओं पर कैसे प्रतिक्रिया करें:

दूसरों की सकारात्मक, नकारात्मक या भावनात्मक आवेश पर प्रतिक्रिया करना चाहें, तो समानुभूति और पुष्टि या समर्थन इसके तरीके हो सकते हैं।

सहानुभूति

समानुभूति दिखाने में सक्षम होना, एक सबसे बड़ी कुशलता है, जो आप आसानी se सीख सकते हैं। ऐसी दुनिया में जहां लोग ज्यादातर समय दूसरों के दोष ढूंढते रहते हैं और लोगों में भय या क्रोध उत्पन्न करते रहते हैं, वहां उस भय और क्रोध पर समानुभूति एक मरहम का काम कर सकती है। याद रखें, आपको खुद को सामने वाले की परिस्थिति में रखकर सोचना है, और उनकी मदद करनी है।

सहानुभूतिपूर्वक सुनने के 8 तरीके

सहानुभूति अधिकांश लोगों में स्वाभाविक रूप से मौजूद होती है, और कुछ खास गतिविधियां लोगों के बीच सहानुभूति या सहयोग को बढ़ा सकती हैं। दूसरों की पीड़ाओं को खुद अपने अंदर महसूस करना सहानुभूति दिखाने का मुख्य आधार है। वक्ता की तरफ अपना ध्यान आकर्षित करें। उस समय 'कई कार्य करना' या 'तेजी से पुनः ध्यान केंद्रित करना' आपको मुश्किल में डाल देगा।

1

अपना निर्णय न थोपें। वक्ता के मुद्‌दे को कमतर या हल्का बनाने की कोशिश मत करें।

2

शब्दों के पीछे छिपी भावनाओं पर गौर करें। क्या वक्ता क्रोधित है, डरा हुआ है, तनावग्रस्त है या आक्रोशित है? शब्दों के साथ-साथ भावनाओं की भी प्रतिक्रिया करें।

3

शांत रहें। ऐसा न सोचें कि आपको तत्काल ही उत्तर देना होगा। अक्सर यदि वक्ता की बात खत्म हो जाने के बाद आप कुछ देर शांत रहें, तो वे खुद ही चुप्पी तोड़ेंगे और समाधान पेश करेंगे।

4

शारीरिक लगाव दर्शाएँ। शारीरिक लगाव दर्शाने से ऑक्सीटोसिन का स्तर बढ़ सकता है और आप दोनों लोग बेहतर महसूस कर सकते हैं। परिस्थिति के अनुसार जैसा भी उचित हो, हल्के से हाथ दबाएँ, गले लगाएँ या कंधे पर हाथ रखें।

5

आश्वस्त करें कि आप समझ गए हैं। स्पष्ट करने के लिए प्रश्न पूछें और आपके विचार में वक्ता जो कह रहा है, उसे दोहराएँ।

6

व्यक्ति का सम्मान करें और उसे अपमानित न करें।

7

उसके दृष्टिकोण को समझने तथा उसकी विशेष जरूरतों को निर्धारित करने के लिए उससे बातचीत करें।

8

अपनी इच्छा और क्षमता के अनुसार ज़रूरतें पूरी करने में उसकी मदद करें।

जटिल व्यक्ति के प्रति सहानुभूति व्यक्त करना

हम सभी अपने आस-पास मौजूद ऐसे लोगों को जानते हैं जो अड़ियल, स्वार्थी, कट्‌टर, लापरवाह, छली, अविश्वसनीय, चिड़चिड़े, जिद्‌दी, अज्ञानी, द्वेषपूर्ण, ऊधमी, रूखे, बोरियत भरे, लालची, काम में दखल करने वाले, और शर्मिन्दा करने वाले होते हैं तथा लोग अक्सर उन्हें पसंद नहीं करते। ऐसे लोगों के प्रति आप सहानुभूति कैसे दिखा सकते हैं? इसका तरीका यह है कि आपको व्यक्ति के लिए सबसे अच्छा चाहने के लिए किसी को पसंद नहीं करना होता है। उसकी व्यथा को देखकर आप दुखी हो सकते हैं और उससे यह अपेक्षा रख सकते हैं कि वह इस बात को अच्छी तरह से समझ ले कि वह किस तरह दूसरों को गुस्सा दिलाता है, वह अपने अंदर सुधार लाए, अधिक जिम्मेदार बने, दूसरों की अधिक परवाह करे और अधिक संतुष्ट व शांतिपूर्ण होने के लिए कदम उठाए।

पुष्टि करना

पुष्टि करना, अपनी बात पहुँचाने का बेहतर तरीका है। इसका इस्तेमाल करने से संघर्ष खत्म हो सकते हैं, विवाद सुलझ सकते हैं, और गहरे विश्वास वाले रिश्ते बन सकते हैं। पुष्टि करने का अर्थ है कि दूसरे व्यक्ति की जो भी परिस्थिति है, आपने उसे समझ लिया है और उसे स्वीकार कर रहे हैं। पुष्टि करने का अर्थ यह नहीं है कि आप सहमत हैं या अनुमोदन कर रहे हैं। अस्वीकृति, उपेक्षा और आलोचना करना, पुष्टि करने के विपरीत हैं।

सरल शब्दों में, इस तरह से कहना पुष्टि करना होता है कि, 'हम पुष्टि करते हैं कि उन्होंने अभी एक भावनाओं का पुलिंदा प्राप्त किया है।' चुनौती यह है कि वे जिस तरह से यह भावनाओं का पुलिंदा खोलना चाहें उस तरह से उन्हें खोलने दें।

दूसरों की भावनाओं का कैसे पुष्टिकरण करें

किसी से यह कहना कि, 'मैं समझता हूं', आमतौर से मददगार साबित नहीं होता, और यह उनकी भावनाओं को कमतर करने का प्रयास लगता है। उस व्यक्ति ने जो भावनाएं साझा कीं, उन्हें बस पुष्ट करने का प्रयास करें। चूंकि हम व्यक्ति की भावनाओं को निश्चित रूप से नहीं जानते, इसलिए ऐसे शब्द प्रयोग करें जो सौम्य हों और संभावनाएं खोलते हों।

आमतौर से, जब लोगों को लगता है कि उनकी बात समझ ली गई है, तो वे मदद प्राप्त करने के लिए अधिक खुलते हैं, और अपने अंदर शांति की खोज करते हैं। यह हो जाने पर वे चुनौती से निबटने के लिए आवश्यक भावनात्मक और आध्यात्मिक बल प्राप्त करते हैं।

खुद का पुष्टिकरण कैसे करें

अपना पुष्टिकरण (स्व-पुष्टिकरण) मूलतः अपने बारे में सच्चा और प्रामाणिक बने रहना है। यदि हम सच्चे और प्रामाणिक नहीं रह पाते हैं, तो हम दूसरों के फायदे के लिए अपनी बलि दे रहे होते हैं, और इसकी सर्वाधिक आशंका है कि हम सामने वाले व्यक्ति की शिथिलता को भी उभार रहे होते हैं। इससे किसी का भला नहीं होगा।

चरण 1

आपको यह ध्यान देना शुरू करना होगा कि आप स्वयं का मूल्यांकन करने की बजाये अपनी समालोचना कैसे करते हैं।

चरण 2

आपको अपनी भावनाओं, आतंरिक-ज्ञान, दूसरों के प्रति करुणा के कामों पर ध्यान देना शुरू करना होगा और साथ ही सजगता से उनका मूल्यांकन भी करना होगा।

चरण 3

स्वयं को प्राथमिकता देते हुए पहले खुद को प्यार करना सीखें; जिसमें सही खाने-पीने, समुचित नींद, व्यायाम, बिना दोषारोपण के अपने बारे में दूसरों से बात करना, कार्य और खेल के बीच संतुलन, अपने पसंदीदा कामों के लिए समय निकालना – जैसी चीज़ें भी शामिल हैं।

इसका अभ्यास करने पर पाएंगे कि आप खुद के बारे में बेहतर महसूस कर रहे हैं, और आपको दूसरों की पुष्टि की आवश्यकता कम होती जाएगी।

आत्महत्या

आत्महत्या और भारत

आत्महत्या, भारत में मृत्यु का दूसरा प्रमुख कारण है। 2010 में 187,000 भारतीयों ने आत्महत्या की- और यह सारे विश्व में आत्महत्याओं का पांचवां भाग है।

यदि आपके मन में आत्महत्या का विचार आता है, तो इसका अर्थ है कि आपकी पीड़ाएं, आपकी सहनशक्ति की सीमा से ज्यादा बढ़ गई हैं। उस क्षण यह दर्द असहनीय और स्थायी महसूस होता है. लेकिन समय और सहायता के साथ आप अपनी समस्याओं और तकलीफ से उबर सकते हैं और आत्महत्या की भावनाये गुज़र जायेंगी।

क्यूं आत्महत्या ही एकमात्र विकल्प प्रतीत हो सकता है

यदि आप आत्महत्या के बजाय अन्य समाधानों के बारे में नहीं सोच पा रहे हैं, तो इसका अर्थ यह नहीं है कि अन्य समाधान मौजूद नहीं हैं, बल्कि सच्चाई यह है कि आप उस क्षण अन्य समाधान देखने में अक्षम हैं। मनोचिकित्सक, परामर्शदाता, दोस्त और प्रियजन आपको वो समाधान खोजने में आपकी मदद कर सकते हैं, जो अन्यथा आपको नहीं दीखते. उन्हें अपनी मदद का मौका दें।

आत्महत्या का आवेग लगभग सदैव क्षणिक होता है

हालांकि यह लगता है कि आपके दर्द और दुख अनंत हैं, लेकिन यह समझना आवश्यक ये मुश्किलें आमतौर से क्षणिक ही होतीं हैं। अक्सर समाधान मिल जाते हैं, भावनाएं बदल जाती हैं, अप्रत्याशित सकारात्मक घटनाएं हो जाती हैं। परिस्थितियां बदलने और दर्द को घटने के लिए खुद को आवश्यक समय दें।

याद रखें, कि ऐसा महसूस होगा कि ये आत्महत्या वाले विचार और अनुभूतियां सदैव बनी रहेंगी, किन्तु यह कभी भी स्थायी दशा नहीं होती। आप फिर से बेहतर महसूस करने लगेंगे।

खुद को नुकसान पहुंचाने वाली कोई गतिविधि न करें, और किसी सुसाइडल हेल्पलाइन (आत्महत्या मदद केंद्र) को कॉल करें।

 

शराब या नशीली चीज़ें न लें।

 

आत्महत्या की अनुभूति को स्वयं तक ना रखे और किसी से बात करें।

 

याद रखें कि आप इस अहसास से उबर जाएंगे।

 

किसी पेशेवर सलाहकार से, या कम से कम दोस्तों व परिवार वालों से मदद लें।

किसी से रोजाना बात करें।

 

अपने पसंदीदा घनिष्ठ व्यक्ति का चित्र सदैव अपने पास रखें।

 

बाहर धूप खाने जाएं और व्यायाम करें।

 

कुछ ऐसी गतिविधि करें जिसमें आपको खुशी मिलती हो।

 

अपने निजी लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करें।

इसे गंभीरता से लें, और उसकी बात सुनें।

 

पेशेवर सहायता लें और निरंतरता से (फॉलो-अप) उपचार कराएं।

 

नुकसान पहुंचा सकने वाली चीज़ें आस-पास से हटा दें।

 

टालने के बजाय शीघ्र मदद की तत्परता दिखाएं।

 

जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव प्रोत्साहित करें।

यदि अभी आपके मन में अभी आत्महत्या के विचार आ रहे हैं, तो कृपया मदद के लिए फोन करें। भारत में 022-25521111 पर कॉल करें या किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करके उसे अपनी व्यथा बताएं।

अपनी भावनाओं को संभालने के लिए आपको विशेषज्ञ की सहायता की ज़रूरत कब होती है?

प्रायः अनुभूतियां व्यक्ति की मनोदशा पर छा जाती हैं। यह किसी व्यक्ति को उस कगार तक पहुंचा सकती हैं जहां परिस्थिति की गंभीरता से निबटने और अंततः उससे उबरने के लिए तत्काल अनुभवी-विशेषज्ञ की सहायता की ज़रूरत हो सकती है। अपनी भावनाओं को संभालने के लिए आपको पेशेवर-विशेषज्ञ की सहायता की ज़रूरत है या नहीं, ये जानने के लिए आपको मानसिक स्वास्थ्य के बारे में समझना होगा।.

भावनात्मक बौद्धिक स्तर

कभी-कभी अपने भावनात्मक बौद्धिक स्तर (Emotional Quotient या EQ) को समझने से भी आपको खुद से व दूसरों से संवाद करने में मदद मिल सकती है। यह प्रश्नोत्तरी हल करके अपना EQ पता लगाएं।

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अपने भावनात्मक स्तीर को जानें

प्रश्नोत्तरी हल करें

अस्वीकरणः यह टेस्ट नैदानिक उपकरण (डायग्नोस्टिक टूल) नहीं है, यह केवल इसका आकलन करने के लिए है कि आप अपनी भावनाओं और अनुभूतियों को कितना समझते और जानते हैं। यह किसी भी प्रकार से पेशेवर जांच नहीं है-उसके लिए आपको किसी सुयोग्य मानसिक डॉक्टर को दिखाना होगा - जिसे यहां खोज सकते हैं।

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साथ मिलकर हम भावनात्मक समस्याओं से परेशान बहुत से लोगों की मदद कर सकते हैं। हर एक छोटे से छोटा दान भी बदलाव ला सकता है।

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हेल्पलाइन संबंधी अस्वीकरण

द लिव लव लाफ फाउन्डेशन (टीएलएलएलएफ) किसी व्यवसाय में शामिल नही है जिसमें सलाह प्रदान की जाती है, साथ ही वेबसाइट पर दिये गए नंबरों का परिचालन, नियंत्रण भी नही करता है। हेल्पलाइन नंबर केवल सन्दर्भ के प्रयोजन से है और टीएलएलएलएफ द्वारा न तो कोई सिफारिश की जाती है न ही कोई गारंटी दी जाती है जो कि इन हेल्पलाइन्स पर मिलने वाली चिकित्सकीय सलाह की गुणवत्ता से संबंधित हो। टीएलएलएलएफ इन हेल्पलाइन्स का प्रचार नही करते और न ही कोई प्रतिनिधि, वारंटी या गारंटी देते हैं और इस संबंध में कोई उत्तरदायित्व नही लेते हैं जो सेवाएं इनके माध्यम से प्रदान की जाती हैं। टीएलएलएलएफ द्वारा इन हेल्पलाइन नंबर पर किये जाने वाले कॉल के कारण होने वाले किसी भी नुकसान की जिम्मेदारी से स्वयं को अलग किया जाता है।