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प्रवीण वर्ग की भावनात्मक जरूरतों को कैसे पूरा करें

सबसे पहली बात यह है कि अवसाद और व्यग्रता जैसी मानसिक समस्याएं आयु से जुड़ी नहीं होती है। आयु की अवधि पर शोध कर रहे विज्ञानियों ने बताया है कि कुछ दशक पहले तक एक दल वयस्क लोग अपने से कम आयु के लोगों की तुलना में ज़्यादा समय तक नकारात्मक भावनाओं (दुःख, क्रोध, व्यग्रता) की तुलना में सकारात्मक भावनाएं (खुशी, संतुष्टी, समपन्न्ता) अधिक महसूस करते थे।
फिर भी प्रवीण वर्ग की ऐसी कई भावनात्मक जरूरतें होती हैं जिनको पूरा करना पड़ता है, उनके जीवन को अर्थपूर्ण बनाने के लिए। इनमें शामिल हैं असुरक्षा, अकेलापन, उदासी और अलगाव। इन भावनात्मक जरूरतों को पूरा करने से वे अवसाद से दूर रह सकते हैं।

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सुरक्षा

एक वरिष्ठ नागरिक को डर और बेचैनी महसूस हो सकती है, खासकर तब जब वह अकले रहते हो या उनको चलने फिरने में तकलीफ हो। सकारात्मक नज़रिए के साथ ऐसे वास्तविक कदम उठाने की जरुरत है जो घुसपैठियों को रोकने में मददगार हो। उनके पास ऐसा कोई फोन नम्बर या अलार्म बटन होना चाहिए जिससे उनका यह भय दूर हो जाए कि गिर जाने पर या तबियत खराब होने पर उनकी मदद करने कोई नहीं आयेगा।

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जुड़ाव

दोस्तों, रिश्तेदारों और देखभाल करनेवालों से जुड़े रहना भावनात्मक स्वस्थता का एक अहम पहलू है। परिवार के छोटे सदस्यों को उनसे मिलने जाने को कहें, और लगातार फोन पर सम्पर्क बनाए रखें। फोटो, किताबें, संगीत आदि यादों को ताज़ा रखनें में महत्वपूर्ण हैं। उनसे उन माध्यमों से जुड़े रहें जिनके वे आदि हो, जैसे पत्र लिखना।

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समाज

अपने समाज से जुड़े रहने उनके लिए महत्वपूर्ण होता है। यह उन्हें अपने परिवार के बाहर की दुनिया से जोड़ता है। इसमें शामिल हैं समान रूचि अनुसार काम करने वाले दल और सहायक दल। आप उनको ऐसे दलों से मिलने में प्रोत्साहित कर सकते हैं, उन सबको एक साथ किसी स्थानीय कार्यक्रम, धार्मिक कार्यक्रम या बाज़ार जाने में अपनी गाड़ी उपलब्ध करवा कर। कुछ स्थानीय संस्थाएं आप की मदद कर सकते हैं उनकी पसंदीदा जगहों पर उन्हें ले जाने में या उनकी रूचि के लेख प्रकाशित कर रहें संवादपत्र भेज कर्।

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मनोरंजन

उम्र के साथ होने वाली समस्याएं उनके मनोरंजक कार्यों में बाँधा न बने, इसका ख्याल आप रख सकते हैं। जैसे कि, अगर उन्हें ठिक से दिखाई न दे रहा हो तो उनके लिए उनके प्रिय साहित्यकारों द्वारा लिखी गई किताबों के बड़े अक्षरों में छपे संस्करण खरीदें या उनके चश्मे के नम्बर की जाँच करवाएं। घर पर उनके प्रिय बोर्ड गेम्स, पहेलियों, ताश जैसे मनोरंजक साधनों को उपलब्ध करवाएं।

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योजना

आगे की सोचें। भविष्य में उनकी जरूरतें क्या हो सकती हैं उसका आकलन करें। मन मिज़ाज में आ रहें परिवर्तनों पर ध्यान दें और देखभाल के लिए सहायक का प्रबंध करें। आगे क्या-क्या करना पड़ सकता है उन्हें क्रमिक रूप से लिखें। नियमित अंतराल के बाद उनके स्वास्थ की जाँच करवाएं ताकि किसी भी शारीरिक समस्या का निदान शुरूआती दौर में किया जा सके। ध्यान रखें ताकि वे समय पर अपनी दवाईयां बताये गये नियम अनुसार ले। आप उनकी दवाइयों को हर दिन के खुराक के आधार पर बाँट कर रख सकते हैं। इससे उनके अंदर गलत या अधिक दवाई ले लेने का डर समाप्त हो जाएगा। उनकी इच्छानुसार उनकी सम्पत्ति हेतु वसीयत बनाने में मदद करके आप उनकी व्यग्रता को काफी हद तक कम कर सकते हैं।

इन सबके अलावा, उनकी स्वेच्छाचार और नियंत्रण में होने की भावनाओं का सम्मान करें – उन्हें अपनी पसंद व्यक्त करने का अधिकार होना चाहिए। निर्णय लेते समय उनकी राय माँगें। उनकी गोपनीयता की जरूरत का सम्मान करें – मौक़ों पर सोच-विचार और तजुर्बों को सशक्त करने दें। लघु कार्यों के माध्यम से जीवन का उद्देश्य और प्रसंग ढूँढने में, और पूर्णता प्राप्त करने और सक्षम बनने में उनकी मदद करें।

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साथ मिलकर हम भावनात्मक समस्याओं से परेशान बहुत से लोगों की मदद कर सकते हैं। हर एक छोटे से छोटा दान भी बदलाव ला सकता है।

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