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बुढ़ापे का अवसाद, कारण और लक्षण

बुढ़ापा कभी कभी मधुमेह, रक्तचाप और हृदय की समस्याओं जैसी चिकित्सा जटिलताओं के साथ आता है। इनका चिकित्सकों द्वारा दवा की मदद से इलाज किया जा सकता है, लेकिन बुढ़ापे के साथ आने वाली मानसिक जटिलताओं का क्या हो? एक सामान्य चिकित्सक अवसाद, व्यग्रता, तनाव और अन्य मानसिक जटिलताओं तथा इनके बढ़ने पर बीमारियों के इलाज के लिए योग्यता या ज्ञान नहीं होगा। चलिए बुढ़ापे के अवसाद के कारण और लक्षण पर नजर डालते हैं।

कारण

जैसे हमारी उम्र बढती है हमारे शरीर और दिमाग में कई परिवर्तन होते हैं, हमारा ऊर्जावान और चुस्त शरीर धीमा और काफी नाजुक हो जाता हैं। मन भी कमजोर हो जाता है, मानसिक झटके, दुख और तनाव के स्तर को संभाल लेने की क्षमता, जो युवावस्था में पर्याप्त थी, कम होनी शुरू जाती हैं। इसके कई कारण हो सकते है, उनमें से कुछ को देखते हैं।

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समाज और वित्तीय स्थिति

जब हम अपने जीवन के सूर्यास्त के दौरान अपने जीवन में कम हासिल कर पाने के बारे में सोचने लगते हैं तब अवसाद हमारे अन्दर जगह बना लेता है। हम अपने चारों ओर पड़ोसियों, सहकर्मियों या रिश्तेदारों को खुद से बेहतर स्थिति में देखते हैं और स्वयं से अपनी कीमत और उपलब्धियों पर सवाल करने लगते हैं। सबसे बुरी बात यह कि हम जानते हैं कि इसके बारे कुछ भी करने के लिए अब बहुत देर हो चुकी है। तो अगर आप अपने पिता या माता को इस स्थिति से गुजरता देखते हैं, उनके लिए चीजें आसान कीजिए। उन्हें याद दिलाते रहिए कि वह कितने सफल रहे हैं।

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बच्चों की शादी होना या घर छोड़ना

जब आप अपना घरौंदा बनाने के लिए घर से निकल जाते हैं तो अक्सर अपने पीछे एक रिक्तता छोड़ जाते हैं जो कि आपके माता-पिता को भरने में बहुत मुश्किल होती है। उन्होंने आपको बड़ा होते हुए देखा है, और भले ही वे आप के स्वतंत्र होने या शादी करने से गर्व और खुश हो सकते हैं, लेकिन साथ ही वे अकेला भी महसूस करना शुरू कर देंते हैं। तो सुनिश्चित करें कि आप समय-समय पर उनके पास जाएँ या कम से कम नियमित रूप से उनका हलचल लेने के लिए बात करते रहिए।

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चिकित्सा जटिलताओं

भारत में खास तौर पर बुढ़ापा कभी कभी स्वास्थ्य समस्याओं की एक श्रृंखला के साथ आता है। ये बीमारियां अक्सर एक न एक रास्ते से मन को प्रभावित करती हैं। एक समय का चुस्त व्यक्ति उम्र बढ़ने के साथ बढ़ती उम्र की मुश्किलों का सामना कर सकता है और दूसरों पर निर्भरता और बेकार होने की भावना उनके मन में भर सकती है। यह अवसाद, व्यग्रता और अन्य मानसिक बीमारियों में बदल सकता है। तो अगर आपके माता-पिता या बड़े जिनकी आप देखभाल कर रहे हैं ऐसी मुश्किल में लगते हैं, उन लोगों के साथ धैर्य से रहें। याद रखें कि वे आपके साथ धैर्य से रहे थे जब आप छोटे थे।

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