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सोशल मीडिया अवसाद

आपने आखिरी बार कितनी देर पहले अपना कोई सोशल मीडिया प्रोफाइल चेक किया था? 10 मिनट? एक घण्टा? तीन घण्टे?

सम्भावना यह है कि बहुत ज्यादा देर पहले नहीं। साल 2007 से लेकर अब तक सोशल मीडिया इस्तेमाल कर रहें लोगों की संख्या काफी बढ़ गई है, और इन आकड़ों के लगातार बढ़ने की ही सम्भावना है।

शोधकर्ताओं ने पाया है कि उपयोगकर्ता सामाजिक तौर पर जोड़नेवाले माध्यमों पर प्रति दिन औसतन 35 मिनट, चित्र साझाकरण प्लेटफार्मों पर 25 मिनट, और समाचार और कनेक्ट करने के माध्यमों पर कम से कम एक मिनट खर्च करते हैं। अगर हम दिन का इतना समय सोशल मीडिया पर व्यय करते है, तो सवाल यही खड़ा होता है कि “क्या सोशल मीडिया से हमें खुशी मिलती है?”

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि सोशल मीडिया नेटवर्क पर दिन में सिर्फ एक घंटे खर्च करने से यह आपके समग्र जीवन की संतुष्टि को 14 प्रतिशत कम कर सकता है (मैकडूल एवं अन्य, 2016)। अगर इनका इस्तेमाल करने के बाद आप व्यग्र या उदास महसूस करते है तो यह कुछ कारण है जिनकी वजह से ऐसा हो सकता है।

सोशल मीडिया से होने वाली उदासी के यहां कुछ कारण बताये जा रहें हैं:

सामाजिक तुलनात्मक सिद्धांत

ब्रिटेन में किये गये एक अध्ययन के मुताबिक, जिन छात्रों ने फेसबुक पर अधिक समय बिताया था, उनके यह सोचने की अधिक संभावना थी कि उनकी तुलना में अन्य लोग ज्यादा खुश हैं और उनका जीवन बेहतर है (चाउ और एज, 2012)। ऐसा सामजिक तुलना के कारण होता है। आप सोशल मीडिया का जितना इस्तेमाल करेंगे, उतनी ही ज्यादा सम्भावना है कि आप अपनी तुलना दूसरों से करेंगे। इसके अतिरिक्त, क्योंकि लोग अपनी आदर्श छवि प्रस्तुत करते हैं, लोग सकारात्मक तुलना पर ध्यान न देकर नकारात्मक तुलना अधिक करते हैं।

परिमित स्रोतों की कमी

शोधकर्ताओं ने फेसबुक के उपयोग और उसके बाद के नकारात्मक मनोदशा के बीच संबंध पाया है (सेजीओग्लू और ग्रिटमेयर, 2014)। सोशल मीडिया पर अधिक समय व्यतीत करने का तात्पर्य होता है उन कार्यों के समय में कटौती करना जो आपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं। घर के बाहर रहना और ऐसे कार्यों में अपने आप को व्यस्त रखना जैसे लोगों से आमने-सामने मिलना, खेलकूद करना, या कुछ मनोरंजक करने से आपका मूड तुरंत बेहतर हो जाता है, और इसका असर आपकी समग्र मानसिक स्वस्थता पर पड़ता हैं। दूसरी ओर अगर आप उतना समय सोशल मीडिया पर व्यय करते है तो आप अपने स्वस्थता के स्रोतों को कम कर रहें हैं। सोशल मीडिया के उपयोग के खराब प्रभावों में से एक नींद की कमी है।

साइबर धौंस

अन्त में, जितना ज्यादा समय आप सोशल मीडिया पर व्यतीत करते हैं, उतनी ही अधिक संभावना होती है कि आप साइबर धौंस का लक्ष्य बन सकते हैं। युवा वयस्कों और किशोरों के लिए यह विशेष रूप से सच है। साइबर धौंस का शिकार बनने का सिधा असर आपके भावनत्मक और सामाजिक स्वस्थता, स्वंय के प्रति भावना और आत्मसम्मान पर पड़ सकता है।

अगर आपको लगता है कि ऑनलाइन व्यय करने के बाद आप उदास या चिंतित महसूस कर रहें हैं, तो तुरंत सहायता प्राप्त करें। मुफ्त फोन परामर्श के लिए हमारे साथी हेल्पलाइनों से संपर्क करें।

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