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तनाव क्या है?

तनाव हमेशा बुरा नहीं होता है। आदर्श स्थिति में, तनाव हमें केंद्रित रहने, ऊर्जावान रहने और सजग रहने में मदद करता है और अतिरिक्त ताकत व ऊर्जा देने वाले केमिकल रिलीज करके हमें सक्रिय बनाए रखता है।

तनाव से आपको अपने कार्य समय से पूरे करने, जब आप प्रतिस्पर्धा कर रहे हों तो ध्यान केन्द्रित करने, या किसी परीक्षा की तैयारी के दौरान टीवी देखने के बजाय अध्ययन करने में मदद मिलती है। लेकिन जब तनाव ज्यादा बढ़ जाता है तो यह आपके स्वास्थ्य, मूड, आपकी उत्पादकता, आपके रिश्तों और आपके जीवन की गुणवत्ता को नुकसान पहुंचा सकता है।

तनाव शरीर में क्या परिवर्तन करता है?

अचानक होने वाला तनाव और लम्बे समय से चला आ रहा तनाव, ये दोनों ही आपके स्वास्थ्य के लिए गंभीर समस्याएं पैदा कर सकते हैं। पुराना तनाव आपके शरीर के लगभग हर तंत्र में रुकावट डालता है। यह ब्लड प्रेशर बढ़ा देता है, रोगनिरोधक क्षमता कम कर देता है, हृदयाघात और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ा देता है, इनफर्टिलिटी अर्थात बन्ध्यत्व लाता है, वृद्ध होने की प्रक्रिया तेज कर देता है और आपको मानसिक एवं भावनात्मक समस्याओं के प्रति संवेदनशील बना देता है।

तनाव के प्रकार

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तीव्र तनाव

यह अधिकतर होने वाला तनाव है, जो हाल ही के बीते दिनों में और निकट भविष्य में अपेक्षित मांगों और दबावों से बनता है। यह नई चुनौती, घटना या मांग के प्रति आपके शरीर की तत्काल प्रतिक्रिया है। तीव्र तनाव की छुटपुट घटनाओं से स्वास्थ्य पर कोई भी प्रभाव नहीं पड़ता है लेकिन इसके बहुत ज्यादा होने पर यह आप क्षीण महसूस करते हैं।

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आवर्ती अर्थात बार – बार होने वाला तनाव

बार बार अनुभव किये जाने वाले तीव्र तनाव को आवर्ती तनाव कहते हैं। यह जीवन की कुछ विशेष परिस्थितियों का परिणाम होता है जिन्हें आप बहुत ज्यादा महसूस करते हैं और इन परिस्थितियों के अनुकूल स्वयं को ढाल नहीं पाते हैं। अतिप्रतिस्पर्धी होने और हमेशा चिंतित रहने से आपको आवर्ती तनाव हो सकता है।

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दीर्घकालीन तनाव

इस प्रकार के तनाव में व्यक्ति स्वयं को फंसा हुआ महसूस करता है। दूसरे शब्दों में, यदि तीव्र तनाव दूर नहीं हो पाता और बढ़ने लगता है या लंबे समय तक बना रहता है तो यह दीर्घकालीन तनाव हो जाता है। यह आपके स्वास्थ्य के लिए घातक हो सकता है और कई गंभीर बीमारियों को न्यौता देता है या स्वास्थ्य संबंधी खतरा बढ़ाता है। गंभीर स्थिति में व्यक्ति आत्महत्या तक कर सकता है।

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किसी आघात के बाद का तनाव

यह बचपन में मिले आघात, युद्ध, गरीबी, यौन या हिंसक दुर्व्यवहार से जुड़ा तनाव होता है। इनके कारण व्यक्ति अलग-थलग महसूस करता है और डरावने सपनों और पिछली यादों के माध्यम से व्यक्ति उन्ही घटनाओं की पुनरानुभूति करता है।

तनाव के कारण

हमारे तनावग्रस्त होने का कोई एक कारण नहीं होता। हममें से हर व्यक्ति की, परिस्थितियों के प्रति अलग प्रतिक्रिया होती है और तनाव के कारणों में बाहरी कारक जैसे कि परिवार, कैरियर आदि से लेकर जीवन के प्रति हमारे नजरिए, जैसे कि नकारात्मक सोच और निराशावाद आदि, शामिल होते हैं।

बाह्य कारण

जीवन में बड़े परिवर्तन, कार्य या स्कूल, रिश्तों में आने वाली कठिनाइयाँ, वित्तीय समस्यायेँ, अति व्यस्त रहना, बच्चे और परिवार।

अंतः कारण

दीर्घकालीन चिंताएं, निराशावाद, अपने प्रति नकारात्मक सोच, अवास्तविक अपेक्षायें/ आदर्शवादिता, कठोर सोच, लचीलापन न होना, सब कुछ या कुछ भी नहीं वाली सोच।

तनाव के संकेत और लक्षण

यहाँ पर तनाव के कुछ सामान्य चेतावनी संकेत और लक्षण दिए जा रहे हैं। आप खुद में जितने संकेत और लक्षण पाएंगे, उतना ही आप तनाव के बोझ के निकट हो सकते हैं।
संज्ञानात्मक  लक्षण

संज्ञानात्मक लक्षण

याद रखने की समस्या

ध्यान केंद्रित न कर पाना

सही फैसले न कर पाना

केवल नकारात्मक पहलू देखना

चिंतित होना या तेज़ विचार करना

लगातार चिंतित रहना

भावनात्मक लक्षण

भावनात्मक लक्षण

बदमिज़ाज होना

चिड़चिड़ा या गुस्सैल होना

व्यग्र होना, तनावमुक्त होने में असमर्थ होना

अभिभूत होना

अकेलेपन व अलग-थलग होने की भावना

अवसाद या अप्रसन्नता

शारीरिक लक्षण

शारीरिक लक्षण

दर्द और पीड़ा

दस्त या कब्ज

मतली, सिर चकराना

सीने में दर्द, धड़कन तेज होना

यौन इच्छा न रह जाना

अक्सर जुकाम रहना

व्यवहारात्मक लक्षण

व्यवहारात्मक लक्षण

ज्यादा या कम खाने लगना

बहुत अधिक या बहुत कम सोना

खुद को औरों से अलग-थलग कर लेना

जिम्मेदारियां टालना या अनदेखी करना

तनावमुक्त होने के लिए शराब, सिगरेट या नशीली दवाओं का इस्तेमाल करना

गलत आदतें (उदाहरण के तौर पर नाखून चबाना, पैर हिलाना)

quiz-bulb

तनाव आप पर क्या असर डाल रहा है, इसे समझना ही इसको नियंत्रित करने का पहला कदम है।

प्रश्नोत्तरी हल करें।

अस्वीकरणः यह टेस्ट केवल तनाव के लक्षणों का संकेत देने, और यह समझने के लिए है कि क्या आगे जांचें कराने की ज़रूरत होगी या नहीं। यह किसी भी प्रकार से पेशेवर जांच नहीं है-उसके लिए आपको किसी सुयोग्य डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ को दिखाना होगा-जिसे आप यहां खोज सकते हैं।

  • मैं अपनी मदद कैसे कर सकता हूँ
  • तनाव से परेशान दूसरे लोगों की मैं कैसे मदद कर सकता हूँ?
  • तनाव के साथ मौजूद रहने वाली स्थितियाँ

अपनी मदद करने का पहला कदम यह समझना है कि आपको तनाव है और इसे स्वीकार करना कि इसे नियंत्रित किया जा सकता है। तनाव प्रबंधन को अपनी जीवनशैली में शामिल करने के लिए अपने दैनिक कार्यों में निम्न गतिविधियों को शामिल करें:

खूब हंसें

हँसना वास्तव में तनाव को दूर करने का सबसे अच्छा इलाज है। अच्छी तरह दिल खोल कर हंसने से शारीरिक और मानसिक तनाव दूर होते हैं और इसके बाद 45 मिनट तक आपकी मांसपेशियाँ तनावमुक्त रहती हैं।

 

कुछ ऐसा करें जिसमें आपको आनंद मिले

अपने पालतू पशु को दुलार करें, चित्रकारी, बागवानी करें या अपने पसंदीदा गाने सुनें। इस प्रकार से थोड़ा समय बितायें, अपने में ही खुश रहने से मानसिक तनाव दूर हो सकते हैं।

किसी से बात करें

जिस व्यक्ति पर आप भरोसा करते हैं और अपने सबसे कठिन भय व भावनाओं को उसे बता सकते हैं उससे बात करें। परिवार के उन लोगों या दोस्तों से बात करें जिनके बारे में आपको पता है कि वे आपके बारे में उल्टी-सीधी धारणायें नहीं बनाएंगे।

 

अपने अनुभवों को लिखें

अपने विचार लिखें और तनावमुक्त करने वाली चीजों के बारे में सोचें। इस प्रक्रिया से न केवल आपको अपने अनुभवों को व्यक्त करने का तरीका मिलेगा, बल्कि तनाव पैदा करने वाली वजहें भी समझ में आ जाएंगी।

योग, चिंतन या व्यायाम करें

30 मिनट तक आसान योग या व्यायाम करने से प्रसन्नता का एहसास कराने वाले हार्मोन सक्रिय हो जाते हैं और इससे तनाव को दूर करने में मदद मिलती है।

 

संतुलित आहार खायें

थोड़ी सी ग्रीन टी पीएँ, एक कटोरा सलाद खाएँ या कोई फल खाएँ। ताजे फल और सब्जियाँ हमारे शरीर को विटामिन एवं खनिज लवण प्रदान करते हैं जिससे तनाव को दूर करने में मदद मिलती है।

किसी विशेषज्ञ की मदद लें

यदि आपको लग रहा है कि अपनी स्थितियों से आप खुद नहीं निबट पाएंगे, तो किसी विशेषज्ञ की मदद लें। मदद लेने से आपको तनाव को नियंत्रित करने की क्षमता विकसित करने में मदद मिलेगी।

आपको पता चलता है कि आपका कोई दोस्त या परिवार का कोई सदस्य तनावग्रस्त है, और वह इससे उबर नहीं पा रहा है। तो ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से मदद लेने के साथ-साथ यह भी ज़रूरी है कि आप भी पहल करते हुए उसकी मदद करें।

तनाव कई तरह से प्रदर्शित होता है और सावधानीपूर्वक विचार करने से जब आप पाते हैं कि आपका दोस्त या परिवार का सदस्य तनावग्रस्त है तो आप निम्न तरीके से उसकी मदद कर सकते हैं:

सुनें

कभी-कभी, तनावग्रस्त व्यक्ति केवल यह चाहता है कि कोई उसकी बात सुन ले। वह जो भी कहना चाहता है उसे समय देकर सुनें। सिर्फ खुले दिमाग से सुनें, उस पर कोई धारणा न बनायें।

 

शारीरिक भावों का इस्तेमाल करें

मुस्कराना, हाथ थाम लेना, गले लगाना, सहारा देना आदि ऐसे भाव हैं जो तनाव को कम करने में मदद करते हैं। इनके प्रयोग का लाभ लें ।

साथ मिलकर कोई मजेदार काम करें

यह बेहतर रहेगा कि आप उसे किसी ऐसी गतिविधि में शामिल हों जिसमें उसे खुशी मिले। इन गतिविधियों में सुबह टहलना, उसके पसंदीदा रेस्टोरेंट में खाना खाना या कोई नाटक देखने जाना या पर्वतारोहण पर जाना शामिल हो सकते हैं।

 

फॉलो-अप करें

उसे जतायें कि आप उसकी सचमुच परवाह करते हैं। हो सकता है कि वे इस चीज को हर समय पसंद न करें लेकिन आपको उनके संपर्क में रहना जरूरी है।

मदद माँगने के लिए प्रोत्साहित करें

उसे बतायें कि मदद माँगना अच्छी बात है और बतायें कि यह किस तरह से फायदेमंद हो सकता है। उसे किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से मुलाकात के लिए राजी करने की कोशिश करें, उसके साथ आप भी जाने का प्रस्ताव करें।

आप यहाँ हैं: आपको पता है कि तनाव एक ऐसी समस्या है जिसका उपचार किसी विशेषज्ञ से कराना जरूरी है, और यह कि आप अपनी या अपने दोस्तों या परिवार के किसी सदस्य की कई तरह से मदद कर सकते हैं, जो तनावग्रस्त हो।

नीचे कुछ चीजें बताई जा रही हैं जिन्हें आपको जानना चाहिए ,क्योंकि तनाव शरीर पर नकारात्मक असर डालता है, लम्बे समय में यह कई दूसरी तनाव संबंधी बीमारियों या समस्याओं को उत्पन्न कर सकता है। ये समस्यायें तनाव द्वारा उत्पन्न हो सकती हैं:

हृदय रोग और हृदय की समस्यायें

तनाव-संबंधी दो सबसे गंभीर स्वास्थ्य समस्यायें हैं - दिल की धड़कन बढ़ जाना और उच्च रक्तचाप, जो आगे चलकर दिल का दौरा पड़ने और स्ट्रोक का खतरा बढ़ा देता है।

 

त्वचा की सूजन और अन्य संबंधित समस्यायें

तनाव वाले हार्मोन का स्तर बढ़ जाने से र्‌यूमाटायड आर्थराइटिस, सोरायसिस, एक्जिमा और त्वचा पर रैश जैसी समस्यायें उत्पन्न हो सकती हैं। यह परिवर्तित सूजन की प्रतिक्रिया (altered inflammatory response), प्रतिरोधक क्षमता (immune response) पर भी खराब असर डाल सकती है।

अनिद्रा और नींद की समस्याएं

तनाव के कारण उत्पन्न चिंता, दिमाग को अधिकांश समय सक्रिय बनाए रख सकती है, और इससे तनावग्रस्त व्यक्ति को सोने में कठिनाई आती है या कभी-कभी नींद ही नहीं आती है।

 

मांसपेशियों का दर्द और सिरदर्द

तनाव वाले हार्मोन का स्तर बढ़ने से मांसपेशियों में खिंचाव पैदा हो सकता है और इससे लम्बे समय तक दर्द, अकड़न और सिरदर्द भी बना रह सकता है।

पाचन की समस्यायें और इरिटेबल बावल सिंड्रोम (Irritable Bowel Syndrome) (आईबीएस)

पेट की समस्यायें जैसे मतली और पेट का दर्द, जिनकी कोई डॉक्टरी वजह न हो, भी प्रायः तनाव के कारण हो सकते हैं। लगातार तनाव में रहने वाले लोग अक्सर इरिटेबल बावल सिंड्रोम से उत्पन्न कई समस्याओं को बताते हैं जो कुछ हद तक तनाव से संबंधित होती हैं।

 

मोटापा

जब व्यक्ति तनाव में होता है तो वह अनुचित तरीके से खाने लगता है, वह विशेष रूप से ऐसा भोजन करने लगता है जिसमें चीनी अधिक होती है, जिससे उसका वजन बढ़ जाता है जो तनाव को और बढ़ाता है।

स्मृति दोष

तनाव वाले हार्मोन अधिक बनने से याद्दाश्त तथा अन्य मूलभूत दिमागी कार्यक्षमता को नुकसान पहुंच सकता है। तनाव की वजह से दिमाग अधिक सक्रिय और अस्थिर हो सकता है, जिससे याद रख पाने की क्षमता पर असर पड़ता है। भावनात्मक चोट की वजह से होने वाला तनाव भी स्मृति क्षमता को नुकसान पहुंचा सकता है।

 

निराशा और व्यग्रता

तनाव का सामना करने में खुद को असमर्थ महसूस करने और लगातार चिंतित रहने से भी गंभीर स्वास्थ्य समस्यायें जैसे निराशा और व्यग्रता पैदा हो सकती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नहीं, तनाव सदैव हानिकारक नहीं होता। कभी-कभी, यह लाभप्रद और प्रेरक हो सकता है। उदाहरण के लिए, परीक्षाओं के दौरान या कार्य-संबंधित स्थितियों में, तनावग्रस्त होने से हमें अपने लक्ष्य पर फोकस करने की प्रेरणा मिलती है। हालांकि कभी-कभी तनाव अत्यधिक हो सकता है और इससे हम नकारात्मक प्रतिक्रिया करने लगते हैं, जिससे कई स्वास्थ्य समस्यायें उत्पन्न हो जाती हैं।

अभी से! तनाव का प्रबंधन एक लगातार और दैनिक प्रक्रिया है और इसे जीवनशैली में शामिल करने के लिहाज से कभी भी बहुत जल्दी या बहुत देर नहीं होती।

किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से मिलें। वह आपकी समस्या के बारे में आपको ज्यादा बता पाएगा। हालांकि ऐसे अनेक तरीके हैं जिनसे आप अपनी मदद कर सकते हैं, लेकिन किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ के मार्गदर्शन से आपको सबसे ज्यादा लाभ मिलता है।

जल्दी उत्तेजित हो जाना और अस्थिर मनोदशा, स्थितियों पर नियंत्रण खोते जाने के अहसास के साथ खुद को लिप्त महसूस करना, निरर्थकता की भावना महसूस करना और तनावमुक्त हो पाने में असमर्थता आदि तनाव के सामान्य संकेत हैं। इन लक्षणों के स्पष्ट शारीरिक असर भी दिख सकते हैं।

दवाओं से फायदा होता है लेकिन इसे कम समय के लिए ही लेना ठीक रहता है, लेकिन तनाव को दूर करने के लिए चिरस्थायी समाधान तनावमुक्ति और प्रबंधन तकनीकों को अपनाना है।

हालांकि आमतौर से इन दोनों शब्दों का आपस में अदल-बदलकर इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन ये समान नहीं हैं। तनाव, किसी ऐसी स्थिति के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया है जिसके लिए शारीरिक, मानसिक या भावनात्मक सामंजस्य या प्रतिक्रिया की ज़रूरत हो। इसके सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं। इसके विपरीत व्यग्रता प्रायः भय, असहजता या चिंता से उत्पन्न होती है। हमारे दैनिक जीवन में हालांकि व्यग्रता अनुभव करना सामान्य बात है, लेकिन व्याकुलता के दौरे, अज्ञात भय (फोबिया), सामाजिक दुश्चिंता और अन्य अनेक संबंधित लक्षणों से इसका पता चलता है।

हाँ, ऐसा न करने की कोई वजह नहीं होती। अपने विवेक का प्रयोग करें।

क्या आपको ऐसा भय तब भी लगता है जब आपको वायरल बुखार होने पर या कोई हड्‌डी टूट जाने पर आप किसी डॉक्टर को दिखाने जाते हैं? यदि इसका उत्तर नहीं में है, तो यही बात तब भी लागू होती है जब आप किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ को दिखाने जाते हैं। आप अपनी परेशानी दूर करने के लिए बस किसी विशेषज्ञ की मदद ले रहे होते हैं।

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