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आत्महत्या समाधान नहीं है

डॉ वी सेन्थिल कुमार रेड्डी

26 वर्षीय आईटी पेशेवर मनोज अपने काम को लेकर ईमानदार है, और उसके कार्यकुशलता की सराहना उसके सहकर्मी और मालिक करते हैं। हाल ही में उसे लगने लगा था कि वह अपने काम का बोझ नहीं सह पा रहा है; वह हमेशा थका हुआ महसूस करता, और उसे काम पर ध्यान देने में और नींद की दिक्कतें हो रही थी। उसके पिता, जिन्हें बहुत ज्यादा शराब पीने की लत थी, अक्सर उसकी माँ से लड़ते थे। पिता के शराब पीने की लत, माँ के स्वास्थ्य और परिवार की माली हालत को लेकर मनोज इतना परेशान रहने लगा था कि वह आत्महत्या के बारे में सोचने लगा था।

कॉलेज के दूसरे सेमेस्टर की परीक्षा में असफल रहने क बाद मनोज को इसी तरह के आत्मघाती विचार आते थे। उस समय उसने अपने रूममेट रवि के साथ इन विचारों को साझा किया था, और इससे उसे राहत मिली थी। रवि के साथ बात करके और, कॉलेज क्रिकेट टीम का सदस्य होने की वजह से क्रिकेट पर अपना ध्यान केन्द्रित करके मनोज इस नकारात्मक मनोभाव से उबर पाया था।

कॉलेज के दिनों में किस तरह से उसने इन विचारों से छुटकारा पाया था, इस बात को याद करते हुए मनोज ने उसी उपाय का प्रयोग फिर से करने का निर्णय किया। उसने रवि को फोन मिलाया और नियमित रूप से व्यायाम करने लगा। मनोज ने पाया कि उसका मानसिक कष्ट और आत्महत्या के विचार कम होने लगे थे। काम पर उसका प्रदर्शन भी सुधरने लगा था। हालांकि वह अभी भी अपनी पारिवारिक स्थिति को लेकर परेशान था, लेकिन आत्महत्या के विचार से दूर हटकर और रवि की मदद से वह भविष्य को लेकर अब नई योजनाएं बना पा रहा था।

हर तीन में से एक व्यक्ति अपने जीवनकाल में कभी न कभी आत्महत्या के बारे में सोचता है। यह एक साधारण अपितु परेशान करनेवाली अभिज्ञता है, जिसे किसी के साथ साझा करना मुश्किल होता है। लोग अक्सर इस बारे में बात नहीं करना चाहते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि बात करने से इच्छा बढ जायेगी या उनके प्रियजनों को दुःख होगा। लेकिन जो लोग इस विषय पर बातचीत करते हैं उन्हें ऐसे विचारों से मुक्ति मिलती है।

आत्मघाती विचार बार बार आ सकते हैं और यह विशेष रूप से तब तीव्र होते हैं जब व्यक्ति अकेला होता है या व्यस्त नहीं होता है। परिवार या घनिष्ठ दोस्तों के साथ समय बिताने और गतिविधियों में स्वयं को व्यस्त रखने से आत्महत्या के विचारों की तीव्रता और आवृत्ति दोनों को कम किया जा सकता है। सुखद गतिविधियों का सिलसिला, एक नया शौक या किसी पुराने शौक को फिर से शुरू किया जा सकता है। लोगों का कहना है कि मनपसंद गतिविधियों से ही खुशहाली की भावना उजागर होती है।

आत्मघाती विचार कम होते हैं, जब कोई सचेत होकर यह याद करने कि कोशिश करता है कि इसी तरह की परिस्थितियों को पहले उन्होंने कैसे पछाड़ा था, और स्वयं की मदद हेतु किन कार्यों का सहारा लिया था। मनोज ने अपनी वर्तमान स्थिति का मुकाबला करने के लिए अपने पिछले अनुभवों का सहारा लिया था।

आत्मघाती विचार दिन के किसी एक विशेष समय पर अधिक प्रबल होते हैं, और यह दिन में कई बार से लेकर कुछ दिनों या कुछ महिनों के अंतराल में वापस आ सकते हैं। इन विचारों को दूर करने के लिए एक सुरक्षा योजना बनाना बहुत उपयोगी है; साथ ही जरूरत के समय में सहायता प्राप्त करने के लिए चरणबद्ध विकल्प नीति भी होनी चाहिए। इन्हें अगर लिखकर रखा जाए तो यह कार्य और सरल हो जाता है:

आत्मघाती विचार जिन व्यक्तियों को आते हैं वे असल में अपने इस दर्द से मुक्त होना चाहते हैं। स्व-सहायता के लिए तय की गई रणनीतियां आत्मघाती विचारों को कम करने और संकट को दूर करने में बहुत मदद करते हैं। यदि आपको लगता है कि इन प्रयासों के बावजूद आपको आत्महत्या के विचार आ रहें हैं, तो एक मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें। स्थानीय चिकित्सक भी आपकी मदद कर सकते हैं।

डॉ वी सेन्थिल कुमार रेड्डी निमहांस के मनोचिकित्सा विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर हैं।

अधिक जानकारी के लिए,
सुबह 9 बजे से शाम 4:30 बजे के बीच निमहांस सेंटर फॉर वेल बीइंग (एनसीडब्ल्यूबी) को +919480829670/ (080) 2668594 पर कॉल करें।

इस आलेख की सर्वप्रथम रचना और प्रकाशना व्हाइट स्वान फाउंडेशन द्वारा की गई थी, और इसे द लिव लव लॉफ फाउंडेशन के लिए संपादित किया गया है।

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