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जो धौंसियाए गए, धौंसियाने वाले और धौंसियाने के गवाह पर धौंसियाने का प्रभाव

धौंसियाने का इसमें शामिल सभी लोगों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है; पीड़ित, धौंसियानेवाला और जो पास खड़े थे। दबंगई के कारण शारीरिक चोट, सामाजिक समस्याएं, भावनात्मक समस्याएं और यहां तक कि मौत हो सकती है। बच्चे और किशोर जो धौंसियाने का शिकार होते हैं उनमें अवसाद, व्यग्रता, सिर दर्द और स्कूल में समायोजित करने की समस्याओं सहित मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। यह लंबी अवधि में आत्मसम्मान के लिए नुकसान का कारण बन सकता है।

धौंसियाने के परिदृश्य में विभिन्न भूमिकाएं:

  1. वह व्यक्ति जो धौंसियाने के व्यवहार में संलग्न रहता है
  2. पीड़ित जो धौंसियाने के व्यवहार के अधीन लक्ष्य किया जाता है
  3. एक सहायक जो धौंसियाने के व्यवहार में सहायता करता है और सक्रिय रूप से भाग लेता है
  4. एक समर्थक जो मुस्कुराकर, हँस कर या टिप्पणियां करके प्रोत्साहित करता और धौंसियाने के लिए मौन स्वीकृति देता है
  1. एक मूक दर्शक जो देखता है या जानता है कि किसी को धौंसियाया जा रहा है, लेकिन निष्क्रिय है और कुछ भी करता नहीं है, यह एक वयस्क दर्शक भी हो सकता है
  2. एक रक्षक जो धौंसियाए गए छात्र का बीच में पड़कर समर्थन करता है, शिक्षक का सहारा लेकर या उन्हें दिलासा देकर साथ देता है।

धौंसियाए गए छात्र धौंसियाए गए छात्र

धौंसियाए गए बच्चे शारीरिक, स्कूल और मानसिक स्वास्थ्य की दृष्टि से नकारात्मक स्थिति का अनुभव कर सकते हैं। जो बच्चे धौंसियाए गए हैं उनमें अनुभव करने की अधिक संभावना है:

  • अवसाद और व्यग्रता, उदासी और अकेलापन की भावनाओं में वृद्धि, नींद और खाने के पैटर्न में परिवर्तन और जिन गतिविधियों में वे आनंद लेते रहे उनमें रूचि कम होना। ये मुद्दे वयस्कता तक रह सकते है।
  • स्वास्थ्य की शिकायतें
  • शैक्षणिक उपलब्धि घटना- जीपीए और मानकीकृत परीक्षण स्कोर और स्कूल भागीदारी। उनमें स्कूल जाने में अनिच्छा, उससे बचना या एकदम छोड़ देने की संभावना बढ़ जाती है।
  • बहुत छोटी संख्या में धौंसियाए गए बच्चे बेहद हिंसक ढंग से प्रतिक्रिया कर सकते हैं।

दूसरों को धौंसियाने वाले छात्र

जो छात्र जानबूझकर दूसरों को धौंसियाते हैं उनको अपने कार्यों के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। जो अपने साथियों को धौंसियाते हैं उनमें अपने दूसरे सहपाठियों की तुलना में यह लक्षण दिखाई देते हैं:

  • झगड़े का हिस्सा होते हैं
  • चोरी करना और संपत्ति के लिए उपद्रव मचाना
  • शराब पीना और धूम्रपान करना
  • खराब ग्रेड आना
  • स्कूल में नकारात्मक माहौल देखना
  • हथियार रखना

वे छात्र जो पास खड़े रहते हैं

वे छात्र जो पास खड़े रहते हैं:

  • स्कूल में भाग लेने के अनिच्छुक
  • भयभीत या कार्य करने के लिए शक्तिहीन और क्रियाशील नहीं होने के दोषी
  • अवसाद और व्यग्रता सहित मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में वृद्धि होना
  • तंबाकू, शराब या अन्य मादक द्रव्यों के उपयोग में वृद्धि होना

धौंसियाने का अक्सर एक दुष्चक्र होता है और सभी वयस्क शिक्षक, स्कूल स्टाफ और माता-पिता, सकारात्मक दर्शक व्यवहार मॉडल लें और यदि वे छात्रों के बीच धौंसियाने वाला व्यवहार देखते हैं तो हस्तक्षेप करना चाहिए। जब धौंसियाना जारी रहता है और स्कूल कोई कार्रवाई नहीं करता, तो छात्रों को सीखने में कठिनाई होने से पूरे स्कूल का वातावरण प्रभावित हो सकता है, वहां बच्चे असुरक्षित महसूस करते हैं और स्कूल को नापसंद करते हैं। छात्र असहाय भी महसूस करते हैं जब वे देखते हैं शिक्षकों और कर्मचारियों का बहुत कम नियंत्रण है और उन्हें छात्रों की परवाह नहीं है।

लेकिन यह ध्यान रखना चाहिए कि जो छात्र दूसरों को धौंसियाते हैं उनमें सभी नहीं मगर कुछ में स्पष्ट व्यवहार समस्या होती है या नियम को तोड़ने की गतिविधियों में लगे रहते हैं। उनमें से कुछ सामाजिक रूप से अत्यधिक कुशल और अपने शिक्षक तथा अन्य वयस्कों के साथ व्यवहार में अच्छे हैं। यह धमकाने वाले कुछ लड़कों के लिए सच है, लेकिन शायद इससे भी ज्यादा धौंसियाने वाली लड़कियों के बीच बहुत आम है। इस कारण से, वयस्कों के लिए अक्सर खोजना या कल्पना करना मुश्किल होता है कि ये छात्र धौंसियाने के व्यवहार में शामिल हैं।

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