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अपमानजनक रिश्तों में महिलाओं की स्थिति को समझना

एक भारतीय महिला अपमानजनक रिश्ते की वजह से अक्सर अवसाद, व्यग्रता और तनाव की शिकार होती है। लेकिन शोषण की शिकार भी अपमानजनक रिश्ते को तोड़ने के लिए तैयार नहीं होती हैं। क्या यह एक प्रकार से स्टॉकहोम सिंड्रोम का परिणाम है या कि वे अपने साथी के लिए महसूस किए गए स्नेह का अवशेष है?

अपमानजनक रिश्ते हर आकार और प्रकार के होते हैं। यह हमेशा शारीरिक ही नहीं होता है। वहाँ सामाजिक शोषण, भावनात्मक उत्पीड़न, यौन शोषण या यहां तक कि वित्तीय दुरुपयोग तक होता है। यह दुर्व्यवहार मूल रूप से वर्चस्व और विनम्रता की चरम सीमाओं से क्रियाशील होता है।

अमेरिका में मानसिक स्वास्थ्य के राष्ट्रीय संस्थान द्वारा वित्त पोषित एक सर्वेक्षण में कम आय वाली 611 शहरी महिलाओं के अनुभवों को देखा तो कुछ रोचक परिणाम सामने आए। एक भारी मात्रा में कुल मिलाकर 42.8 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि वे उस वर्ष अपने पुरुष साथियों द्वारा दुर्व्यवहार की शिकार हुई हैं! यौन और शारीरिक शोषण तो फिर भी दर्ज किए जाते हैं लेकिन वे मानसिक शोषण के मुकाबले कम आम थे। और फिर भी, उनमें से आधी से अधिक महिलाएं तब भी अपने साथियों को भरोसेमंद मानती हैं और उनमें से हर पांचवीं महिला ने अपने साथी की महत्वपूर्ण सकारात्मक विशेषताएं बताई, जैसे स्नेही या भरोसेमंद होना!

इन निष्कर्षों के आधार पर अध्ययन दुर्व्यवहारकरने वालों को तीन मुख्य समूहों में बांटते हैं- ” भरोसेमंद पर अपमानजनक”- जो नमूने का सबसे बड़ा हिस्सा 44 प्रतिशत है, “सकारात्मक और नियंत्रण रखने वाला” जो हिंसा पर कम ध्यान देते हुए सकारात्मक लक्षण जैसे निर्भरता दिखाते हैं जो 38 प्रतिशत हैं और अंत में नमूने के 18 प्रतिशत पुरुषों को “खतरनाक तरीके से उत्पीड़नकारी” माना जो सकारात्मक लक्षण पर कम और हिंसा पर अधिक जोर देते है।

नियंत्रण का भ्रम

इन मतभेदों के बावजूद, – हिंसा करने वालों से लेकर नियंत्रित करने वालों तक- सभी उत्पीड़नकारी मूल रूप से कमजोर होते हैं। इसलिए वे नियंत्रण का भ्रम बनाए रखने के लिए अपमान करते हैं। पीड़ित भी अपनी तरह से असुरक्षित महसूस कर रहे होते हैं, उनमें हो सकता है आत्मसम्मान कम हो या अपने सामाजिक मूल्य का भान न हो जिसके कारण वे अपने को अपमानजनक भागीदारी के लिए प्रस्तुत करने और इस तरह से अपना सामाजिक मूल्य स्थापित करने की जरूरत महसूस करते हैं।

उत्पीडन करने वाले में नियंत्रण करने की और प्रताड़ित महिला में अपनी ओर ध्यान आकर्षित करने की मनोविकारी ज़रुरत एक एस एंड एम स्थिति उत्पन्न करती है जिसे तोड़ना मुश्किल है। वास्तव में यह उत्पीडन का एक स्वजनित और स्वपोषित कुचक्र का क्लासिकी उदहारण है.

भावनात्मक अरुचि ग्रस्त

अपमान करने वाले ऐसा अक्सर इसलिए करते हैं क्योंकि वे असुरक्षित, भयभीत या उनमे स्वजातीय-उत्कृष्टता में विश्वास रखने वाली भावना विकसित नहीं होती है और सब कुछ एक अहंकारपूर्ण नजरिए से देखते हैं। ऐसे मामलों में पीड़ित अक्सर भावनात्मक अरुचि ग्रस्त होती हैं- जो प्यार की कमी से जूझ रही होती हैं और उनको प्रताड़ित करने वाला जब उन पर उदार होता है तो उसके पास चली जाती हैं।

यही कारण है कि पीड़ितों के लिए अक्सर अपमानजनक रिश्तों को छोड़ना मुश्किल होता है। अक्सर उन्हें पता नहीं होता या महसूस नहीं करती हैं कि वे एक अपमानजनक संबंध में हैं या वे इसे नकारती रहती हैं या यथास्थिति के साथ बहुत सहज रहती हैं। पीड़ित आमतौर पर इसलिए बनीं रहती हैं क्योंकि अक्सर इन रिश्तों में आघात और दर्द के साथ असली प्यार भी शामिल होता है।

यहां तक कि बेहद मजबूत महिलाएं भी कभी कभी उसी स्थिति में रहना चाहतीं हैं क्योंकि छोड़ना अधिक डरावना हो सकता है – हो सकता है वे आर्थिक रूप से अपने साथी पर निर्भर हो या हिंसा के खतरे की आशंका भी अधिक हो जा सकती है अगर वे अलग हो जाएं। आंकड़े बताते हैं कि घरेलू हिंसा और हत्या के 70 प्रतिशत हादसे तब होते हैं जब प्रताड़ित अलग हो जाते हैंI

परिणामस्वरूप पैदा मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति

यह सब पीड़ित में भारी तनाव, व्यग्रता और अवसाद पैदा करता है, कुछ विश्लेषक तो इसे लगभग पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी) मानते हैं। अपमानजनक रिश्तों और पीटीएसडी के शिकार के बीच एक आम लक्षण है – अलगाव और वैराग्य की भावना – जो पीड़ितों को अपने साथ हुई प्रताड़ना को भूल जाने देता है। यही कारण है कि वे उन्ही रिश्ते में बने रहते हैं, क्योंकि वे मनोवैज्ञानिक रूप से आघात को विस्मृत करने में लगे रहते हैं। पीटीएसडी अपमानजनक रिश्तों में रहने वाली महिलाओं के लिये अपने परिस्थिति का सामना करने का एक तरीका है, जहाँ वास्तविकता से इनकार कर, अन्दर देखने की भावना का व्यवहार – उनके मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों को और ख़राब करता है।

अपमानजनक रिश्तों में बंधी रहने वाली प्रताड़ित महिलाओं पर दोषारोपण की भी एक प्रथा है जो सिर्फ तनाव को बढ़ाती है। इस दुष्चक्र को समाप्त करने के लिए, पहला कदम यह होना चाहिए कि ऐसे एक अपमानजनक रिश्ते में पीड़ित पर क्या बीत रही है इसको पूर्ण और केवल करुणा के साथ समझें। जो स्वयं अपमानजनक रिश्ते में है (या यदि हम ऐसे किसी को जानते हों) तो पहला कदम होना चाहिए उसकी मदद का प्रस्तावI प्रथम कदम के बाद, चिकित्सक से संपर्क और प्रताड़ना की रिपोर्ट की जा सकती है। इस बात की अत्यधिक सावधानी और करुणा की ज़रुरत है जिससे प्रताड़ित यह महसूस करें कि वे सुरक्षित जगह में हैं और व्यक्ति को खुलकर बता सकते हैं कि क्या आघात हुआ और क्या बीत रही है। यह भी सहायक होता है कि प्रताड़ित को यह ना लगे कि उसको आंका जा रहा है। इस तरह की सटीक लेकिन दयालु मदद में अक्सर पेशेवर देखभाल शामिल होती है और यह बेहतर है कि जल्द से जल्द उपचार की तलाश की जाए।

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