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किशोरावस्था में कब शराब या नशीले पदार्थों का प्रयोग मानसिक स्वास्थ्य की समस्या के संकेत बन जाते है?

शराब और ड्रग्स हमेशा से समस्या से जूझते बच्चों से गुंथी हुई है। इसके साथ ही इसे एक निश्चित वर्ग के किशोरों के लिए साथियों के बीच उत्तेजनाहीन होने की परिभाषा जैसा माना जाता है। अध्ययनों से पता चलता है कि वह उम्र, जिसमें आप ने पहली बार शराब पीने की कोशिश की थी उससे यह संकेत मिलता है कि क्या आप शराब पीने की निर्भरता से ग्रस्त हैं। इसलिए जो बच्चे 12 साल की उम्र में शराब पीना शुरु करते हैं उनमें से 40% शराब के लती हो जाते हैं। जब उम्र 16-18 के लिए ऊपर चली जाती है तो यही दर गिर कर 16% हो जाती है।

भारत में शराब पीने के लिए कानूनी उम्र विभिन्न राज्यों में अलग अलग है, लेकिन औसतन यह 25 वर्ष है और फिर भी आप को खरीदने और उपभोग करने के लिए परमिट या लाइसेंस की जरूरत होती है। बेशक यह कहा नहीं जा सकता है कि कई युवा उतने लंबे समय तक पहली बार शराब पीने की कोशिश करने का इंतजार नहीं करते। और 25 के बाद, कुछ के लिए, साथियों के साथ शराब की दैनिक खपत अक्सर उनकी संस्कृति या दिनचर्या का हिस्सा हो जाती है।

मादक पदार्थों के मामले में यह और जटिल हो जाता है क्योंकि वे गैरकानूनी घोषित हैं लेकिन जिस व्यक्ति को उसकी अधिक तलब होती है और जिसके पास इसे खरीदने के लिए पैसे हैं उसे वह आसानी से उपलब्ध हो जाती है। हेरोइन या कोकीन जैसी हार्ड ड्रग्स के साथ जुड़ी कलंक की भावना उतनी अधिक नहीं है जितनी मरिजुअना या एम्फ़ैटेमीन्स जैसी पार्टी ड्रग्स के साथ है जिसका मतलब है कि अगर कोई किशोरों के ऐसे समूह के साथ रहता है जो प्रयोग करना पसंद करता है, संभावना है कि किसी बिंदु पर उस दल के सदस्य मादक पदार्थों का उपयोग कर चुके होंगे।

शराब या नशीले पदार्थों का सेवन कब मानसिक स्वास्थ्य समस्या का संकेत करता है – क्या यह लत का मामला है या अवसाद या व्यक्तित्व विकार की तरह अंतर्निहित मुद्दे का? इन लक्षणों को देखना महत्वपूर्ण है। चूंकि बच्चे तो बच्चे ही रहेंगे इसलिए शराब और नशीले पदार्थों के प्रयोग पर पहली बात करने के लिए वयस्क देखभाल करने वाले/ माता-पिता/ अभिभावक या संरक्षक उनके साथ बैठें और सीधा, जिम्मेदाराना, नपातुला, स्पष्ट तरह से बात करें कि शराब और नशीले पदार्थ का दुरुपयोग कैसे उनके जीवन को प्रभावित करेगा। उनको स्वीकर कराना या उन्हें नीचा दिखाना महत्वपूर्ण नहीं है। बल्कि ये समझना होता है कि वे उज्ज्वल कार्यात्मक प्राणी है जिनको यह जानने की जरुरत है कि जो कुछ भी उनकी समस्या हो वे उसका हल खोजने के लिए आपके पास आएं न कि शराब और नशीले पदार्थों के पास जाएँ।

दूसरी बात यह उम्मीद की जाती है कि आप सीमाओं और गोपनीयता का सम्मान करेंगे। यह भी महत्वपूर्ण है कि अपने बच्चों पर नजर रखें और साथियों के साथ शराब या नशीले पदार्थों का सेवन करने के बारे में उसकी जाँच करते रहिए। आप उन पर 6 से 12 महीने तक गौर करें और यदि इस अवधि में शराब/मादक पदार्थों के विड्राल (नशा न करने पर होने वाले लक्षणों) के संकेत, शराब या मादक पदार्थों की अधिक खपत, शराब या मादक पदार्थों को हासिल करने या पहुँच बनाने के लिए अत्याधिक प्रयास, दोस्तों के साथ कम से कम बातचीत या स्कूल या अन्य रूचियों में कमी, अन्य चीजों के उपयोग के प्रयास में कटौती करने आदि को देखतें हैं तो उनके लती होने का खतरा हो सकता है।

यह महत्वपूर्ण है कि मौके पर दुरुपयोग पकड़ लिया जाए, लेकिन यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि लत के लिए अंतर्निहित लक्षण या कारण की सही ढंग से पहचान की जाए और मदद दी जाए। यह नशेड़ी को न सिर्फ दुरुपयोग चक्र से बाहर आने का मौका देगी बल्कि उसे यह भी समझाना आसान होगा कि इसका समाधान संभव है। यह भी कि लोग मदद करने की कोशिश कर रहे हैं। शराब की लत या मादक द्रव्यों के सेवन से ढेरों समस्याएँ पैदा हो सकतीं हैं। इसमें अवसाद या कम आत्मसम्मान या व्यग्रता या तनाव या परित्याग से जुड़े मामले शामिल है। इनको प्रशिक्षित मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों द्वारा सही ढंग से पहचाना और कम किया जा सकता है। माता-पिता या संरक्षक के रूप में यह वयस्कों के लिए महत्वपूर्ण है कि वे समस्या को देखें और अपने दम पर रोकने की कोशिश करने के बजाय मदद की पेशकश करें।

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